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CAA: पूरी दिल्ली में हुए अनोखे प्रदर्शन, कहीं सड़कों पर चित्रकारी तो कहीं राजा या बागी बनने की पेशकश

Sat, 04 Jan 2020 12:37 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जामिया के विद्यार्थियों की ओर से किए जा रहे सत्याग्रह को शुक्रवार को महिलाओं समेत कई संगठनों का साथ मिला। जामिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा सीएए के विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ किए जा रहे सत्याग्रह के बीच रीडिंग फॉर रिवोल्यूशन मुहिम की शुरुआत की गई है। जामिया के छात्रों ने निर्णय लिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, तब तक वह सड़कों पर पढ़ाई करेंगे। आने वाले दिनों में छात्रों की परीक्षाएं हैं। ऐसे में पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए छात्रों ने यहां रीडिंग फॉर रिवोल्यूशन मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत छात्रों ने सत्याग्रह स्थल पर एक पुस्तकालय स्थापित किया है। जहां से छात्र पुस्तकें लेकर पढ़ाई कर रहे हैं।

आगे तस्वीरों में देखें कैसे अनोखे अंदाज में नागरिकता कानून का दिल्ली में हो रहा विरोध...

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- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारियों ने पाश और फैज की नज्में लिखीं चादरें फैलाकर पैदल मार्च निकाला। सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस पर महिला फेडरेशन, जामिया, जेएनयू स्टूडेंट एसोसिएशन, नार्थ ईस्ट यूनाइटेड जस्टिस एंड पीस फेडरेशन, ट्रासजेंडर कम्यूनिटी और बिरसा-फुले स्टूडेंट एसोसिएशन से जुड़े लोग, खासकर महिलाओं ने मार्च में सीएए और केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। 
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- फोटो : शुभम बंसल
बीम बूम बूम- ध्यान से सुनो सेे खींचा ध्यान
संगवारी थियेटर ग्रुप ने बूम बूम बूम- ध्यान से सुनो गाकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों ने सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि सरकार के जुल्म से उनका सत्याग्रह और मजबूत हो गया है।

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- फोटो : शुभम बंसल
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि सीएए कानून बेशक देश के मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह देश के संविधान के मुताबिक बिल्कुल नहीं है। संविधान में लिखा है, हम भारत के लोग, लेकिन सीएए कानून देश के सभी लोगों को एक समान अधिकार नहीं देता है। छात्रों का कहना है कि देश के मुसलमानों को आखिर कब तक साबित करना पड़ेगा कि वह इसी देश के नागरिक हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
ऐ रहबर-ए-मुल्क ओ कौम बता, ये किसका लहू है कौन मरा, सड़कों पर लिखा 
छात्रों का सत्याग्रह 21वें दिन भी लगातार जारी रहा। इस दौरान छात्रों ने सरकार को जगाने और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कई विशेष रास्ते अपनाये हैं। छात्रों ने जामिया व उसके आस-पास की सड़कों पर चित्रकारी की है। विश्वविद्यालय के गेट संख्या-10 पर प्रतिदिन पांच छात्र भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि जब तक सरकार सीएए को समाप्त करने और पुलिस द्वारा उन पर की गई कार्रवाई की न्यायिक जांच कराने का आदेश नहीं देती, यह सत्याग्रह जारी रहेगा। ये किसका लहू है कौन मरा...साहिर लुधियानवी की लिखी यह नज्म जामिया के छात्रों ने सड़कों पर उकेरी है।
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- फोटो : शुभम बंसल
गांधी जौहर शैफुल हिंद का नारा बुलंद रहेगा
पुलिस ने जिस तरह विश्वविद्यालय में घुसकर छात्रों को पीटा, देशभर में लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया, उससे सीएए के खिलाफ हमारा आंदोलन मजबूत हुआ है। गांधी जौहर शैफुल हिंद, जामिया के छात्रों का हमेशा से नारा रहा है, यह नारा आगे भी बुलंद रहेगा। 
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- फोटो : शुभम बंसल
टैक्स के पैसों पर नहीं पढ़ रहे, टैक्स अदा करें इसलिए पढ़ रहे
छात्रों का कहना है कि सरकार और उनके नुमाइंदे लगातार जोर देकर कहते रहते हैं कि जामिया और जेएनयू में पढ़ने वाले छात्र देश केे टैक्स के पैसे से पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि हम कल को टैक्स अदा कर सकें, इसके लिए यहां पढ़ाई करते हैं। 

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- फोटो : शुभम बंसल
जुल्म बढ़ता है तो मिट जाता है, खून टपकता है तो जम जाता है
जामिया की छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तस्वीरें सड़कों पर उकेरी हैं। साथ ही जुल्म बढ़नेे के बाद उसके खत्म होने और खून टपकने के बाद जम जाने जैसी बातें भी लिखी हैं। छात्रों का आंदोलन अब धीरे-धीरे कलात्मकता और दिल को छू लेने की तरफ बढ़ रहा है।

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- फोटो : शुभम बंसल
प्रदर्शनकारी सावित्री बाई फुले और आंबेडकर की तस्वीरें लिए हुए थे। छात्र संगठन ‘बोल के लब आजाद हैं तेरे’ के नारे बुलंद करते हुए आगे बढ़ रहे थे। सीएए, एनपीए, एनआरसी और केंद्र सरकार से आजादी की मांग कर रहे थे। मंडी हाउस सेे छात्रों का कारवां बढ़ता गया और प्रत्येक चौराहों पर लोग उसके साथ जुड़ते गए। मार्च के बाद महिला संगठनों ने कहा कि सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख के सपने पूरे होते नजर आ रहे हैं। क्योंकि बीते 22 दिनों से जामिया में प्रदर्शन का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।

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शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
शाहीन बाग : जुल्म सहने वालों को इकट्ठा होने की अपील

जामिया के छात्रों ने शुक्रवार शाम को लगभग तीन किलोमीटर लंबा कैंडल मार्च निकाला और शाहीन बाग पहुंचकर वहां चल रहे विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। हजारों की तादाद में सड़कों पर निकल छात्रों ने आजादी के नारे लगाए। सीएए और एनआरसी के खिलाफ मरते दम तक खड़े रहने की बात कही। शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने जामिया के छात्रों के समर्थन का स्वागत किया। पिछले 19 दिनों से लगातार यहां सत्याग्रह कर रही लगभग 80 साल की बुजुर्ग महिला बिलकिश ने कहा कि हमारे सत्याग्रह ने वो कर दिया जो बड़ी से बड़ी ताकत भी नहीं कर पाई। इस प्रदर्शन में महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर शामिल हुईं। सबका एक ही नारा था, ले के रहेंगे आजादी। 

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शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
डफली बजाते छात्र कदम पीछे खींचने को राजी नहीं
जामिया विश्वविद्यालय के छात्र यहां पर डफली बजाते हुए बस एक ही रट लगाए हुए हैं, सरकार को उखाड़ के रहेंगे। उनका मानना है कि मौजूदा केन्द्र सरकार जब से सत्ता में आई है, लगातार वह देश के मुस्लिमों के खिलाफ फैसले कर रही है।

सिख समुदाय ने दिया समर्थन
शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन का शुक्रवार को सिख समुदाय के लोगों ने भी समर्थन किया। पंजाब से दिल्ली पहुंचे प्रो जगमोहन सिंह, डॉ सुखप्रीत सिंह, दल खालसा से कवरपाल सिंह और परमजीत सिंह टांडा, सिख यूथ ऑफ पंजाब से परमजीत सिंह मन्ड और मंधीर सिंह शामिल के अलावा सिख समुदाय के तमाम अन्य लोगों ने केन्द्र सरकार के खिलाफ यहां चल रहे प्रदर्शन का समर्थन किया। 
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शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
राजा बनने या बागी बनने की पेशकश
अब यह प्रदर्शन कहां जाकर खत्म होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन शाहीन बाग में शुक्रवार को एकत्रित भीड़ को देखकर सत्याग्रह पर बैठे लोगों का मनोबल बढ़ा दिखाई दिया। यहां पहुंच सिख समुदाय के लोगों ने मंच से नारा बुलंद किया, कि अब वह या तो राजा बनेंगे या बागी बनेंगे, उन्हें दूसरे दर्जे की नागरिकता मंजूर नहीं है।
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