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बुराड़ी कांडः मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम के बाद बैकफुट पर आई दिल्ली पुलिस, अब भी अनसुलझे हैं ये 5 सवाल

Sat, 15 Sep 2018 03:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
बुराड़ी के भाटिया परिवार की मौत के मामले में मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के सभी दावे फेल कर दिए है। रिपोर्ट से पता चला है कि 11 लोगों की मौत आत्महत्या नहीं थी। अभी तक दिल्ली पुलिस इस घटना को आत्महत्या से जोड़कर देख रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस का कहना था कि भाटिया परिवार के सभी सदस्यों ने आत्महत्या की थी। पूजा पाठ करने से पहले घर के कुछ सदस्य फांसी पर लटकने की तैयारी भी कर रहे थे।
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
पड़ोस से मिले सीसीटीवी फुटेज को आधार बताकर दिल्ली पुलिस ने इसका हवाला भी दिया था, लेकिन अब केंद्रीय फॉरेसिंक विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस बैकपुट पर नजर आ रही है। अब पुलिस का कहना है कि बड़ पूजा करते वक्त जो तरीका अपनाया था, वह आत्महत्या जैसा ही था। लेकिन परिवार खुदकुशी करना नहीं चाहता था, वे महज एक हादसे के शिकार हुए।
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
इन लोगों की हुई थी मौत      
भाटिया परिवार में सबसे बुजुर्ग 77 वर्षीय नारायणी देवी, उनकी बेटी प्रतिभा (57), दोनों बेटे भवनेश (50) और ललित (45) के अलावा भवनेश की पत्नी सविता (48), उनके तीनों बच्चे मनिका, नीतू और धीरेंद्र के साथ ललित की पत्नी टीना और बेटा दुष्यंत एवं प्रतिभा की बेटी प्रिंयका की मौत हुई थी। इनमें नारायणी देवी को छोड़ अन्य सभी 11 लोग फांसी पर लटके पाए गए थे। जबकि नारायणी देवी मृत अवस्था में अपने कमरे में मिली थीं।

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burari death case
अनसुलझे हैं कई सवाल
मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के सभी दावे फेल कर दिए हैं वहीं कुछ ऐसे सवाल हैं जो अब भी अनसुलझे हैं। जैसे...
-आखिर ललित के कहने पर पूरा परिवार एक साथ कैसे हो गया था फांसी पर लटकने को तैयार?
-परिवार के किसी सदस्य ने क्यों नहीं जताया था विरोध?
-कई दिनों से अनुष्ठान की हो रही थी तैयारी तो पड़ोसियों और रिश्तेदारों को क्यों नहीं लगी भनक?
-माना जाता है कि किसी अनहोनी की खबर कुत्ते को समय से पहले ही चल जाती है, तो फिर कुत्ता क्यों नहीं भौंका और कुछ ही दिन बाद वह सदमे में भी चला गया।
-क्या इतनी गोपनीय थी तैयारी कि इसका जिक्र बच्चों ने भी किसी से नहीं किया?
 
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में लिखा है कि भाटिया परिवार का कोई भी सदस्य मौत को गले लगाना नहीं चाहता था। ललित की बातों में आकर बेशक फांसी के फंदे पर झूल गए। उन्हें विश्वास था कि उनमें से किसी की भी मौत नहीं होगी, जबकि हकीकत में ऐसा हुआ नहीं। सभी परिजनों के शव फांसी पर झूलते हुए अगले दिन सुबह पड़ोसियों ने देखे। जुलाई माह में बुराड़ी निवासी भाटिया परिवार की इस घटना ने जहां पूरे देश में सनसनी पैदा कर दी थी। वहीं दिल्ली पुलिस ने सीबीआई को पत्र लिखते हुए घटना का मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम कराने की अपील की थी।
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burari death case - फोटो : जी पाल
मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम के तहत फॉरेसिंक विशेषज्ञ मृतक परिवार के सदस्य, दोस्त और रिश्तेदारों के अलावा पड़ोसियों से पूछताछ करते हैं। व्यवहार से लेकर दिनचर्या तक पर बातचीत करते हैं। साथ ही घर में मौजूद छोटी से छोटी वस्तु का आंकलन करते हुए उसे भावनात्मक और क्रियात्मक रुप से पड़ताल में लाते हैं। मशहूर सुनंदा पुष्कर मौत मामले में भी फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम किया था। बताया जा रहा है कि सीबीआई के फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने जांच के दौरान भाटिया परिवार के घर से बरामद रजिस्टरों के अलावा दोस्तों और पड़ोसियों से पूछताछ की थी। साथ ही परिवार में बचे कुछ ही लोगों को भी मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम का हिस्सा बनाया था। विशेषज्ञों ने भाटिया परिवार के बचे दिनेश सिंह और बहन सुजाता नागपाल से भी परिवार के बारे में बातचीत की थी। ये दोनों ही सदस्य भाटिया परिवार से अलग रहते थे। विशेषज्ञों की मानें तो ललित की बातों में आकर ही पूरा परिवार अनुष्ठान में शामिल हुआ और उसी दौरान ये घटना हुई। 
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