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1 घर 11 मौत: फांसी लगाने से पहले खाया था ये खाना, अब होगी जांच

Wed, 04 Jul 2018 06:42 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बुराड़ी में 11 लोगों की मौत मिस्ट्री - फोटो : अमर उजाला
बुराड़ी के घर से मिले 11 लोगों के शव की गुत्थी सुलझने में फिलहाल थोड़ा वक्त लग सकता है। इसकी वजह है बिसरा जांच। घर से सुराग मिलने के बाद अब फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने बिसरा जांच शुरू कर दी है। गोपनीय सूत्रों के अनुसार मंगलवार को टीम ने बिसरा जांच शुरू कर दी है। आमतौर पर इसमें काफी वक्त लगता है। चूंकि भाटिया परिवार का यह मामला बड़ा और गंभीर है। इसलिए फॉरेसिंक विशेषज्ञ भी जल्द से जल्द ठोस नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि घर से मिले सैंपल की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। फॉरेसिंक विशेषज्ञ अभी भी कुछ चीजों की जांच में जुटे हैं। इसमें फिंगरप्रिंट अहम भूमिका निभा सकता है।
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burari death case
गौरतलब है कि सोमवार को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के फॉरेसिंक विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों ने 11 शवों का पोस्टमार्टम किया था। इसके बाद पुलिस ने 10 लोगों के फांसी लगाने की पुष्टि भी की, लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान कुछ लोगों के पेट में फ्लूड (तरलीय पदार्थ) पाया गया था। इसे जांच के लिए पुलिस ने रोहिणी स्थित एफएसएल लैब भेजा है। जहां बताया जा रहा है कि मंगलवार से फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने जांच करना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो इस प्रक्रिया में फॉरेसिंक विशेषज्ञों को ज्यादा वक्त लग सकता है। अनुमान है कि 15 दिन के भीतर दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट मिल सकती है।
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burari death case
एक फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद यह साबित हो चुका है कि इनकी मौत फांसी की वजह से हुई है, लेकिन इस गुत्थी को सुलझाने के लिए इतना काफी नहीं है। पेट में मिले फ्लूड की जांच में पता चलेगा कि इन्होंने फांसी लगाने से पहले क्या कुछ खाया था? क्या किसी ने इन्हें नशीला पदार्थ या जहर तो नहीं दिया था? हालांकि इसमें एक तथ्य यह भी है कि फ्लूड में अगर नशीला पदार्थ या जहर मिलता है तो सभी के बिसरा जांच गहनता से होगी। अगर सभी बिसरा में एक जैसा परिणाम देखने को मिलता है तो निश्चित ही केस में नया मोड़ देखने को मिल सकता है।
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burari death case
फिंगर प्रिंट से मिल सकता है बड़ा सुराग 
एक वरिष्ठ फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि जिन कपड़ों पर भाटिया परिवार लटके मिले थे। फॉरेसिंक टीम के पास रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। इन पर फिंगर पि्रंट की जांच की जा रही है। चुन्नी और साड़ी पर फिंगर प्रिंट टेस्ट के बाद यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इनके गले में फंदा डाला किसने? इतना ही नहीं टीम इस केस में ब्लू प्रिंट की मदद भी ले रही है। इसकी मदद से दीवारों और कमरों में किन किन लोगों के फिंगर और फूट पि्रंट हैं, उनका भी पता चलेगा। विशेषज्ञ का कहना है कि फिंगर या फूट प्रिंट 24 घंटों तक कपड़ों या दीवार अथवा किसी भी वस्तु पर देखा जा सकता है। 
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