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हे मां! अधूरी रह गई तेरी तीर्थ यात्रा, हमारा तो पूरा परिवार ही उजड़ गया, परिजनों को देख हर आंख नम

Sat, 12 Oct 2019 05:21 PM IST
शाहरुख खान विकास वत्स, अमर उजाला, बुलंदशहर
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बुलंदशहर में दर्दनाक हादसा - फोटो : अमर उजाला
हे मां, नियति को शायद यही मंजूर था, ऐसा तो किसी ने सोचा भी न था। कुछ घंटों पहले तो सब तीन अक्तूबर से अब तक के सुहाने सफर और दर्शनों को लेकर प्रफुल्लित थे। लेकिन, अचानक सब कुछ बदल गया। खुशी पलभर में चीत्कार में तब्दील हो गई। हे मां, तेरी यात्रा अधूरी रह गई। हमारा तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। करूण रूदन के साथ बिलख रहे परिजन पोस्टमार्टम हाउस और घटनास्थल पर बार-बार बेहोश हो रहे थे। परिजनों की करूण वेदना और हादसे की वीभत्सता देख हर कोई उन्हें आश्वासन देने में लगा था। आंखें स्थानीय लोगों व राहगीरों की भी नम थीं। 
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घटनास्थल पर विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि गत तीन अक्तूबर को महेंद्र सिंह का पूरा परिवार व रिश्तेदार गांव मोहनपुरा, हाथरस से बस में सवार होकर नौ देवी दर्शन (हिमाचल में कांगड़ा देवी, नैना देवी, ज्वाला देवी, चामुंडा देवी, चिंतपूर्णी देवी होते हुए जम्मू में मां वैष्णो देवी से बुलंदशहर स्थित बेलोन देवी दर्शन) के लिए निकले थे। परिवार में खुशी का माहौल था। बीते दिनों पूरे परिवार ने हिमाचल और जम्मू में अधिकतर मां के तीर्थ स्थानों के दर्शन किए और अब यात्रा का अंतिम पड़ाव था। पूरा परिवार देर रात ही बस से नरौरा के गांधीघाट के निकट पहुंचा था। 
 
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
कुछ देर पहले बस में लोग एक-दूसरे से पूरी यात्रा के बारे में चर्चा कर रहे थे और माता रानी के जयकारे भी लगा रहे थे। लेकिन, परिवार के उन सात श्रद्धालुओं को क्या पता था बस से उतरने के बाद उनके जीवन की डोर ही टूट जाएगी। वहीं, हादसे के बाद लोगों में यह भी चर्चा थी कि श्रद्धालुओं की बस टी प्वाइंट के बिल्कुल नजदीक खड़ी थी। संभल से आई दूसरी यात्री बस चालक ने जैसे ही बस को मोड़ा होगा तो उसकी नजर जमीन पर सो रहे श्रद्धालुओं पर नहीं पड़ी होगी। चूंकि वहां थोड़ा सा ढलान है और बस की रोशनी नीचे तक नहीं पहुंची होगी। 

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डीएम के सामने हाथ जोड़कर विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बेलोन देवी और नरौरा में गंगा स्नान से पूर्व ही परिवार में कोहराम मच गया। चार महिलाओं समेत तीन मासूमों की अर्थियां एक साथ उठ गईं। वहीं, पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों का कहना था कि वह पहाड़ी इलाकों में सकुशल यात्रा कर सर्व मंगला बेला भवानी के देवी दर्शन के लिए पहुंचे थे। अब बस दर्शन कर घर ही तो लौटना था। लेकिन, अब परिवार उजड़ गया और सात सदस्य काल के गाल में समा गए। 
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इसी बस ने श्रद्धालुओं को कुचला - फोटो : अमर उजाला
काश चाय पीने नहीं जाता तो टल जाता हादसा
हरदुआगंज निवासी रोते बिलखते जितेन्द्र कुमार ने बताया कि रात्रि में बस आकर रुकने के बाद उसे नींद नहीं आई। अन्य सभी लोग सो गए। टाइल्स रास्ते पर अपने परिवार की अन्य महिलाओं के साथ उसकी पत्नी रेनू भी सोई हुई थी। वह इस दौरान वहीं मौजूद था। लेकिन, घटना से कुछ समय पहले ही वह चाय पीने के लिए पास की एक दुकान पर चला गया। इसी दौरान तेज गति से आई एक बस के चालक ने बस को श्मशान के रास्ते पर मोड़ दिया। जिससे उसके टायरों के नीचे कुचलने से सभी की मौके पर मौत हो गई। जितेन्द्र ने बताया कि मोहनपुरा में उसकी ससुराल है। वह सभी लोग 3 अक्तूबर को मोहनपुरा से नौ देवी दर्शन का रवाना हुए थे। 
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मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पुलिस छावनी बना घाट 
घटना के बाद कुछ ही समय पर गंगा घाट का इलाका पुलिस छावनी में बदल गया। नरौरा थाना पुलिस के अलावा रामघाट, डिबाई, अहमदगढ़ थाना पुलिस, पीआरवी फायर ब्रिगेड औरं तहसील प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। घटना की गंभीरता देख डीएम रविन्द्र कुमार, एसएसपी संतोष कुमार, एसपी देहात मनीष कुमार मिश्र, एसपी क्राइम शिवराम यादव भी मौके पर पहुंचे। एनएच के किनारे हुई दुर्घटना के बाद वहां भारी भीड़ होने के कारण पुलिस बल रोड को सुचारू रखने में लगा रहा। डीएम व एसएसपी ने पीड़ित परिवार के सदस्यों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी की और मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने की साथ ही शासन को घटना के बारे में अवगत कराया। 
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मौके पर जमा लोग - फोटो : अमर उजाला
मौके पर नहीं पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिकारी
सिंचाई विभाग का हेड वर्क्स होंने के बाद भी सिंचाई विभाग के एसडीओ और जेई का हेड वर्क्स पर रहना अनिवार्य है। नियमों को ताक पर रखकर अधिकारी बड़े शहरों में अपना आशियाना बनाए हुए है। जबकि एसडीओ व जेई की नरौरा में सरकारी आवास हैं। और नियमानुसार उन्हें यहां निवास करना चाहिए। घाट पर सात लोगों की मौत की घटना में डीएम व एसएसपी 70 किलोमीटर का सफर कर मुख्यालय से सुबह सात बजकर बीस मिनट पर मौके पर पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक मौके पर रहे। लेकिन अलीगढ़ से मात्र 55 किलोमीटर की दूरी पर रह रहे सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचना आवश्यक नहीं समझा। 
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