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बुराड़ी कांड: सपने में ही नहीं, साक्षात ललित पर आती थी आत्मा, पिता के नाम पर सुनाया जाता था फैसला 

Wed, 04 Jul 2018 09:47 AM IST
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
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burari case - फोटो : अमर उजाला
बुराड़ी हत्याकांड की जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है रोज ही नए और अजीबों-गरीब खुलासे हो रहे हैं। 11 लोगों की मौत के रहस्य की जांच करते हुए पुलिस के हाथ ललित के घर से जो दो रजिस्टर व कुछ नोट्स मिले हैं उससे पता चला है कि न सिर्फ ललित के पिता उसके सपने में आते थे बल्कि उनकी आत्मा साक्षात उस पर आ जाती थी।
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घर के बाहर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला
ऐसा होने से पूर्व वह घर के सभी लोगों को एक जगह इकठ्ठा कर लेता था। इसके बाद वह पिता का फैसला सभी को सुनाता था। सभी ललित को अलौकिक और स्पेशल पावर से लैस मानते थे। वहीं पड़ोसियों का कहना है कि घर के छोटे बड़े सभी फैसले ललित ही लेता था। उसका बड़ा भाई भूपी चुपचाप ही रहता था।
 
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burari death case - फोटो : कुमार संजय
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 2010 में ललित व भूपी के पिता भोपाल सिंह चुंडावल की बीमारी के बाद मौत हो गई। इसके बाद उसके पिता ने उसके सपने में आना शुरू कर दिया। शुरूआत में उन्होंने सपने में दिशा निर्देश दिए। इसके बाद उनकी आत्मा उसमें आने लगी।

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burari death case
अपने सभी छोटे-बड़े काम ललित पिता की आत्मा के आदेश पर करता। यहां उसने अपनी दुकानों को बड़ा कराने और घर को दुबारा से बनाने का काम भी पिता की आत्मा के कहने पर किया। पिछले करीब एक साल से ललित पिता के आदेश पर ही अपने घर में निर्माण कार्य करवा रहा था। ठेकेदार कुंवर पाल ने बताया कि रुक-रुककर वह मकान में काम करवा रहे थे। फिलहाल ललित को  कुंवरपाल के एक लाख रुपये भी देना थे। 
 
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ललित - फोटो : अमर उजाला
वहीं घर से मिले रजिस्टर की छानबीन से पता चलता है, ललित व उसका परिवार पिछले काफी दिनों से मोक्ष प्राप्ति की तैयारी कर रहा था। इसके लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा था। सूत्रों की मानें तो इसके लिए दो बार प्रेक्टिस भी की गई थी। ललित व बाकी परिवार का मानना था कि क्रिया को करने से उनकी जान नहीं जाएगी।
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क्राइम ब्रांच की टीम जांच के लिए पहुंची - फोटो : अमर उजाला
रजिस्टर से यह भी पता चला है कि रविवार सुबह 4.38 बजे भद्रा काल लग रहा था। भद्रा काल अशुभ होता है, लिहाजा मोक्ष की प्राप्ति भद्रा काल लगने से पहले ही होगी। इसी लिए परिवार ने रात 12.00 से 1.00 बजे के बीच खुद को फंदे पर लटका लिया।ाकहीं न कहीं उन्हें खुद के बचने का यकीन था। 
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