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करवाचौथ 2018ः मिठाई खरीदने से पहले ध्यान रखें ये बातें, ऐसे करें असली और मिलावटी मिठाइयों की पहचान

Fri, 26 Oct 2018 11:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
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karwa chauth - फोटो : ट्विटर
करवाचौथ, दिवाली, गोवर्धन और भैयादूज पर यदि मिठाई खरीदना चाहते हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि त्योहारी सीजन आते ही बाजार में मिलावटी खोवे से तैयार मिठाइयां बेचने वाले सक्रिय हो जाते हैं। इनके द्वारा केमिकल से दूध बनाकर और उससे खोवा बनाकर मिठाइयां तैयार की जाती हैं। उधर, त्योहारों को देखते हुए जिलाधिकारी ने तीनों तहसील के उपजिलाधिकारियों और खाद्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है वह स्वयं निरीक्षण करें, ताकि कोई व्यक्ति मिलावटी मिठाई न बना पाए।
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दरअसल, एक  के बाद एक कई त्योहारों को लेकर लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। दिवाली पर सबसे अधिक मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है। हर साल खोवा माफिया द्वारा मिलावटी मावा तैयार करके बाजार में असली की तरह बेचा जाता है और अधिकतर लोग उसे पहचान भी नहीं पाते हैं, जबकि केमिकल और रिफाइंड ऑयल समेत कई पदार्थ मिलाकर मिठाइयों को सुगंधित बनाने का प्रयास किया जाता है। यह मिठाइयां स्वास्थ्य के  लिए हानिकारक होती हैं।
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चूंकि खोवा माफिया ने ऐसा केमिकल ईजाद कर रखा है, जिसकी चंद बूंदों से पानी को दूध बना दिया जाता है। मिठाई की खराब गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उसमें रंगों का प्रयोग किया जाता है। रंगबिरंगी मिठाइयों में सिंथेटिक खोवे का प्रयोग किया जाता है, जो सीधे-सीधे जहर का काम करता है।

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केमिकल युक्त रंगों से आ जाती है चमक
खाद्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो हर्बल रंग महंगे होने के कारण अधिकतर दुकानदार अक्सर कम पैसे वाले केमिकल युक्त रंग डालते हैं, जिससे मिठाइयों में चमक आ जाती है। इससे लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ता है। कुछ दुकानदार चांदी के वर्क के स्थान पर एल्युमीनियम से बना वर्क का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जोकि मिठाई का सेवन करने के दौरान पेट में जाता है और नुकसान पहुंचाता है।
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यूरिया से भी बनाया जाता है दूध
जिले में खोवा माफिया सक्रिय हैं और वह किसी भी तरह से दूध बनाने के लिए पूरा प्रयास करते हैं। त्योहारों पर दूध की कमी पूरी करने के लिए माफिया यूरिया का इस्तेमाल करके उससे दूध बनाते हैं। कुछ साल पहले दनकौर के खेरली में यूरिया से बनाया जाने वाला दूध और उसी दूध से मावा तैयार किया जाता था, जिसे प्रशासन की टीम ने पकड़ा था और करीब 50 कुंतल दूध को नष्ट कराया गया था। गौतमबुद्धनगर के जहांगीरपुर कस्बे में मिलावटी घी बनाते हुए भी कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मिलावटी मावा भी कई जगह पकड़ा जा चुका है।
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ऐसे करें असली और मिलावटी मिठाइयों की पहचान
-मिठाइयों में चांदी के  वर्क के स्थान पर अब एल्युमीनियम का वर्क लगाया जाता है। यदि किसी को वर्क की जानकारी लेनी है, तो वह वर्क को लेकर हाथ में रगडे़। यदि वर्क खत्म हो जाता है तो असली है और गोली बन जाए तो वह नकली चांदी का वर्क होगा।
-मिठाई में मावे के स्थान पर कुछ लोग मैदा लगा देते हैं। इससे बहुत ज्यादा परेशानी नहीं होती, मगर इसका स्वाद बदल जाता है। इसे खाकर भी टेस्ट किया जा सकता है। अगर मिठाई असली होगी तो मुंह में नहीं लगेगी और उसमें मिलावट है तो चिपक जाएगी।
-अगर मिठाई में खोवे की स्थिति जांचनी है तो मिठाई को हाथ में रगड़कर हाथ के पीछे वाले हिस्से पर लगाएं और सूंघे की खुशबू वनस्पति की आ रही है या फिर घी की। चूंकि कुछ लोग खोवे की चिकनाई बनाए रखने के लिए उसमें रिफाइंड डाल देते हैं।
-असली खोवे में कभी भी चिपचिपाहट नहीं होती है, यदि खोवे में चिपचिप है तो वह मिलावटी है।
-2 ग्राम खोवे को 5 एमएल पानी में घोले और उसे ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद आयोडीन सॉल्यूशन डाल दें। अगर खोवा मिलावटी है तो उसका रंग नीला पड़ जाएगा।

दिवाली पर मिठाइयों का सबसे अधिक आदान-प्रदान होता है, इसलिए गोपनीय कमेटी बना दी गई है, जोकि लोगों से सूचना एकत्र कर रही है। उसके बाद मिठाइयों की दुकानों पर नमूने लेने का अभियान चलाया जाएगा।-संजय शर्मा, अभिहित अधिकारी

जिले में प्रत्येक व्यक्ति को शुद्ध पदार्थ खाने का अधिकार है और इसलिए खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों को सख्ती से निर्देश दिए हैं कि नकली खोवे या अन्य खाद्यान्न पदार्थ बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।-बीएन सिंह, जिलाधिकारी
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