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तौसीफ है कातिल, लेकिन उन राहगीरों का क्या जिन्होंने अपनी आंखों से देखा खौफनाक मंजर

Wed, 28 Oct 2020 06:08 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
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निकिता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद में सोमवार (26 अक्तूबर) को बीकॉम फाइनल ईयर की एक छात्रा अपने अंतिम वर्ष की परीक्षा देकर घर लौट रही थी। इस बीच दो युवक कार से आए। उनमें से एक ने छात्रा को कार में जबरदस्ती बैठाने की कोशिश की। वह छात्रा को हर कोशिश कर पीछे की सीट पर बैठाने का प्रयास करता रहा। छात्रा भी पूरी ताकत से उसका मुकाबला करती रही।

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बीच-बीच में छात्रा की सहेली युवक को रोकती नजर आई। जब युवक ने देखा कि छात्रा आपे से बाहर हो रही है और किसी तरह वह उसे कार में नहीं बैठा पा रहा तो उसने अपनी बंदूक निकाल ली। उसने पहले तो बंदूक से छात्रा को डराया, फिर देखते ही देखते गोली मार दी। यह सब छात्रा के कॉलेज के सामने ही हुआ।



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जिस जगह पर छात्रा को गोली मारी गई वह कोई सुनसान इलाका नहीं था। वहां पूरे वाकये के दौरान कई लोग मौजूद रहे और इस घटना को अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए देखते रहे। लेकिन कोई राहगीर अपने फोन में मसरूफ था तो बस कोई देखते हुए निकल गया। जैसे उसे कुछ पता ही नहीं चल रहा कि चंद कदम की दूरी पर एक सनकी युवक एक होनहार छात्रा को मौत के घाट उतार रहा है।

इन सभी लोगों के सामने एक छात्रा की दिनदहाड़े हत्या हो गई, लेकिन कोई इतनी हिम्मत नहीं दिखा सका कि आगे बढ़कर छात्रा को बचा ले। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ तौसीफ ने छात्रा निकिता की हत्या की या फिर समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता और डर की भी इसके भूमिका है। 
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अगर वहां मौजूद या वहां से गुजर रहा कोई भी शख्स थोड़ी भी हिम्मत दिखा देता तो क्या आज निकिता जिंदा न होती। क्या अफसर बनने का ख्वाब देखने वाली बिटिया भविष्य में देश की सेवा न करती।

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