मासूम बच्ची के साथ उसकी गुड़िया
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परी की आड़ में डॉक्टरों ने इंजेक्शन तो लगा दिया, लेकिन वे जिकरा को बिस्तर पर नहीं रख पा रहे थे। तभी डॉक्टर को ख्याल आया और उन्होंने पहले गुडिय़ा को पट्टी बांधी, फिर उसके दोनों पैर रस्सी से बांधकर ऊपर लटका दिए। परी की इस स्थिति को देख जिकरा भी चुपचाप पट्टी बंधवाती गई। डॉक्टरों ने गुड़िया की तरह उसके पैरों को भी बांधकर ऊपर लटका दिया। इस बीच जिकरा न रोई, न कुछ कहा। डॉक्टरों का कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों में हड्डी टूटने पर उन्हें इस तरह रखा जाता है, जिससे हड्डी जुड़ने में आसानी हो। जिकरा के मूवमेंट देख डॉक्टर भी दंग थे कि फ्रेक्चर के बाद भी यह बच्ची बिस्तर पर अपनी गुड़िया के साथ करवटें लेती रहती थीं।