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खबर है ये सच्ची: 11 माह की बच्ची ने गुड़िया देख किया जो काम, मेडिकल जगत ने किया सलाम

Wed, 04 Sep 2019 03:39 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जिकरा और गुड़िया पहुंचे घर - फोटो : विवेक निगम
नई दिल्ली के लोकनायक अस्पताल के ऑर्थो ब्लॉक में भर्ती 11 माह की जिकरा 17वें दिन मंगलवार को अपनी गुड़िया परी के साथ वापस घर लौट गई। यह कोई ऐसा मामला नहीं था कि मरीज को कोई बीमारी हुई और डॉक्टर ने उसे ठीक कर दिया और केस खत्म हो गया। यह चिकित्सा विज्ञान का एक ऐसा मामला था जिसमें एक गुड़िया ने बच्ची के इलाज में मदद की। बच्ची जिकरा ने जिस तरह अपनी गुड़िया को देखकर इलाज कराया उसे डॉक्टर अन्य इलाजों के लिए एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं। इस खबर पर अमर उजाला ने शुरुआत से विशेष कवरेज की है। पढ़िए क्या है पूरा मामला...
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जिकरा और गुड़िया को घर ले जाते उनके माता-पिता - फोटो : विवेक निगम
जिकरा 30 अगस्त को उस वक्त सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की चहेती बन गई, जब अमर उजाला ने इस मासूम के अपनी गुड़िया के प्रति लगाव की खबर को प्रकाशित किया। चंद ही घंटों में यह बच्ची फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्स एप पर वायरल हो गई। अस्पताल के 16 नंबर बिस्तर पर उसके दोनों पैर रस्सी से ऊपर बंधे थे और पैरों में पट्टी थी। जिकरा के बिलकुल पास उसकी गुड़िया भी इसी स्थिति में थी। यह केस बाल मनोविज्ञान से जुड़ा होने के कारण चिकित्सा विज्ञान के लिए भी काफी अनोखा था। लोग जिकरा के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करने लगे। इन लोगों के साथ ‘अमर उजाला’ हर दिन जिकरा के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां साझा करता रहा।
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मासूम जकिरा अपनी गुड़िया के साथ अस्पातल में भर्ती - फोटो : विवेक निगम
बीते सोमवार ही जिकरा और उसकी गुड़िया के दोनों पैरों में पक्का प्लास्टर चढ़ाया गया। फिलहाल डॉक्टरों ने उसे दो सप्ताह के लिए घर पर आराम करने को कहा है। मंगलवार को अस्पताल के हड्ड़ी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गुप्ता और उनकी टीम ने मिलकर जिकरा को विदाई दी। हंसते-खिलखिलाते डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ जिकरा के साथ सेल्फी ले रहे थे। उसे किसी ने खिलौने तो किसी ने चॉकलेट गिफ्ट भी की। 

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मासूम जकिरा अपनी गुड़िया के साथ अस्पातल में भर्ती - फोटो : विवेक निगम

हर काम गुड़िया के साथ करती है

जिकरा के पिता शहजाद ओखला मंडी में सब्जी विक्रेता हैं। वे परिवार के साथ दिल्ली गेट स्थित डिलाइट सिनेमा के पास रहते हैं। 17 अगस्त को जिकरा के बेड से नीचे गिरने की वजह से पैर में फ्रेक्चर आया। रोती-बिलखती मासूम को लेकर मां-बाप नजदीकी लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने एक्सरे में फ्रेक्चर की पुष्टि की। बच्ची को भर्ती करना जरूरी था और दर्द से राहत देना भी। जिकरा काफी सहमी हुई थी।
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मासूम जकिरा अपनी गुड़िया के साथ अस्पातल में भर्ती - फोटो : विवेक निगम
डॉक्टर जैसे ही उसे छूते, वह मां की गोद में छटपटाने लगती। काफी मशक्कत के बाद भी उस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका तो जिकरा की मां फरीना ने डॉक्टरों से उसकी गुड़िया लाने की मंजूरी मांगी। परी नाम की यह गुड़िया जिकरा को उसकी नानी ने गिफ्ट की थी। जिकरा दूध पीने से लेकर सोने तक हर काम परी के साथ करती थी। अस्पताल में परी को देख जिकरा खिलखिला गई। यह देख हर कोई भौचक्का था।
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मासूम बच्ची के साथ उसकी गुड़िया - फोटो : अमर उजाला
परी की आड़ में डॉक्टरों ने इंजेक्शन तो लगा दिया, लेकिन वे जिकरा को बिस्तर पर नहीं रख पा रहे थे। तभी डॉक्टर को ख्याल आया और उन्होंने पहले गुडिय़ा को पट्टी बांधी, फिर उसके दोनों पैर रस्सी से बांधकर ऊपर लटका दिए। परी की इस स्थिति को देख जिकरा भी चुपचाप पट्टी बंधवाती गई। डॉक्टरों ने गुड़िया की तरह उसके पैरों को भी बांधकर ऊपर लटका दिया। इस बीच जिकरा न रोई, न कुछ कहा। डॉक्टरों का कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों में हड्डी टूटने पर उन्हें इस तरह रखा जाता है, जिससे हड्डी जुड़ने में आसानी हो। जिकरा के मूवमेंट देख डॉक्टर भी दंग थे कि फ्रेक्चर के बाद भी यह बच्ची बिस्तर पर अपनी गुड़िया के साथ करवटें लेती रहती थीं। 
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मासूम बच्ची अपनी गुड़िया के साथ अस्पताल में भर्ती - फोटो : अमर उजाला

कमरे में फ्रेम कर लगाईं खबरें

शहजाद ने कहा कि बच्ची के घर लौटने की खुशी वे बता नहीं सकते। उन्होंने ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित सभी खबरों को फ्रेम कराकर जिकरा के कमरे में लगाया है। शहजाद ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बच्ची को देश के लाखों-करोड़ों लोगों से इतना प्यार मिलेगा। उन्होंने इसके लिए ‘अमर उजाला’ का आभार भी व्यक्त किया।
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मासूम बच्ची अपनी गुड़िया के साथ अस्पताल में भर्ती - फोटो : अमर उजाला

इस साल दिसंबर में केस होगा तैयार

डॉक्टरों के अनुसार, जिकरा की कहानी को जल्द ही मेडिकल जर्नल का रूप देने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसी वर्ष दिसंबर में पीडिएट्रिक ऑर्थोपेडिक्स सर्जन सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से इस केस का प्रतिनिधित्व किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि जिकरा की कहानी वाकई पूरे चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ा उदाहरण बन गई है। देश के हर अस्पताल में इस तरह से भी बच्चों के उपचार पर ध्यान दिया जा सकता है।
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