यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पतंजलि को जमीन आवंटित करने को लेकर मामला फंसता नजर आ रहा है। बाबा रामदेव की तरफ से दिए गए प्रस्ताव में छूट की अधिक शर्त रखने से जमीन आवंटित करने में अड़चन आ रही है।
प्राधिकरण व शासन स्तर पर अधिकारी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं। यमुना प्राधिकरण के अनुसार, पतंजलि की तरफ से तीन अहम छूट मांगी गई हैं।
पहली तो यह कि करीब 4000 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन उपलब्ध कराई जाए। दूसरी यह कि जमीन को लीज पर देने का अधिकार भी दिया जाए, ताकि वे छोटे भूखंड लेकर किसी और आवंटी को लीज पर दे सकें।
तीसरा यह कि संस्थागत भूखंडों पर 40 फीसदी की छूट मिले। प्राधिकरण का कहना है कि किसान से जमीन लेकर उसे मुआवजा देने, 12 फीसदी आवासीय भूखंड देने और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के बाद आधी जमीन ही आवंटित करने के लिए बचती है।
इस हिसाब से जमीन की लागत ही करीब 8000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो रही है। प्राधिकरण आठ हजार रुपये की जगह 6000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की कीमत पर जमीन देने को राजी है, क्योंकि इसकी भरपाई व्यावसायिक भूखंडों से हो जाएगी, लेकिन 4000 रुपये में बहुत अधिक घाटा होगा।
साथ ही, प्राधिकरण को छोड़कर किसी भी आवंटी को जमीन लीज पर देने का अधिकार देने का प्रावधान नहीं है। फिलहाल, प्राधिकरण ने पतंजलि के लिए कादरपुर गांव में 400 एकड़ जमीन तलाशने की तैयारी चल रही है।
अगर रेट पर बात बनी तो पतंजलि उद्योग इसी जगह लगेगा। एसीईओ अमरनाथ उपाध्याय का कहना है कि पतंजलि से बातचीत चल रही है। अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है।