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जिन गलियों में बच्चे करते थे अठखेलियां ये है वहां का हाल

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सूनी गलियां, घरों में कैद बच्चे, चप्पे-चप्पे पर पुलिस, आरएएफ के नीली ड्रेस में मार्च करते जवान, चारों तरफ दहशत का माहौल....। इन दिनों आदर्श गांव अटाली के लोग हर रोज ऐसी ही जिंदगी जी रहे हैं। जिन गलियों में पिछले सप्ताह तक बच्चे अठखेलियां करते थे अब वहां आगजनी व पथराव के बाद खाकी का पहरा है। कई थानों की पुलिस के साथ अफसरों ने गांव में डेरा डाला हुआ है। इस समय लोग घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो/ फरीदाबाद)
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जिन गलियों में बच्चे करते थे अठखेलियां ये है वहां का हाल

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हां शाम होते ही गांव के बच्चे शोर-मचाकर खेलते थे, लोगों का मनोरजंन करते थे वहीं अब अजीब सा सन्नाटा है। सरकारी स्कूल में पिछले पांच दिनों से न तो क्रिकेट मैच आयोजित हुआ और न ही स्टेडियम में युवाओं ने फुटबॉल खेला। चाय की दुकानें ताश की बाजियों बिना सूनसान हैं। दोनों पक्षों में बातचीत का दौर जारी है, लेकिन विश्वास बहाली बिना राहत शिविर में रह रहे लोगों की ‘घर वापसी’ संभव नहीं है।
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गांव में फिलहाल ऐसा माहौल है कि लोग घर के अंदर खुद को नजरबंद की तरह रखने में ही भलाई समझ रहे हैं। इसलिए गांव की इक्का-दुक्का दुकानों को छोड़कर सबमें ताला है। यही हाल गांव स्थित सरकारी स्कूल का है। जहां पिछले चार दिनों से क्लास नहीं लगी है। यहां स्कूल में बच्चों की जगह हाथ में लाठी और बंदूक लिए जवान खड़े हैं। खौफ का मंजर ये है कि नौकरीपेशा वाले ड्यूटी जाने में कतरा रहे हैं। खेत-खलिहान सब में सन्नाटा पसरा है। पुलिस ने लोगों को समूह में रहने पर पाबंदी लगा रखी है। गांव में रेहड़ी पर सामान बेचने वाले गायब हो गए हैं।

जिन गलियों में बच्चे करते थे अठखेलियां ये है वहां का हाल

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गांव में फिलहाल ऐसा माहौल है कि लोग घर के अंदर खुद को नजरबंद की तरह रखने में ही भलाई समझ रहे हैं। इसलिए गांव की इक्का-दुक्का दुकानों को छोड़कर सबमें ताला है। यही हाल गांव स्थित सरकारी स्कूल का है। जहां पिछले चार दिनों से क्लास नहीं लगी है। यहां स्कूल में बच्चों की जगह हाथ में लाठी और बंदूक लिए जवान खड़े हैं। खौफ का मंजर ये है कि नौकरीपेशा वाले ड्यूटी जाने में कतरा रहे हैं। खेत-खलिहान सब में सन्नाटा पसरा है। पुलिस ने लोगों को समूह में रहने पर पाबंदी लगा रखी है। गांव में रेहड़ी पर सामान बेचने वाले गायब हो गए हैं।
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गांव में अफवाहों का बाजार गर्म है। वाट्सएप पर लगातार आ रहे मैसेज ने ग्रामीणों की नींद उड़ाई हुई है। हर रोज नई बात सुनने को मिलती है। कभी शोर मचता है कि घरों में आग लगा दी है तो कभी मारपीट की सूचना आती है। खौफ इस कदर है कि रात को हल्की सी आवाज में पूरा गांव इकट्ठा हो जाता है।
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पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) पर खाना बनाने वाली महिलाएं एक बार फिर चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। क्योंकि इस विवाद में उपद्रवियों ने पीएनजी लाइन उखाड़ दी थी। अडानी ने अभी सप्लाई शुरू नहीं की है। कंपनी कर्मचारी भी इस विवाद के चलते गांव जाने से कतरा रहे हैं।
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संघर्ष के बाद ज्यादातर अल्पसंख्यक गांव से पलायन कर चुके हैं तो कुछ बहुसंख्यक लोग भी गांव छोड़ अपनी रिश्तेदारियों में जा चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक गांव में अमन-चैन कायम नहीं हो जाता वे गांव में नहीं रहेंगे। घरों के सामने पुलिस बल तैनात है।
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थाना शहर में बने राहत शिविर में रह रहे अटाली गांव के पीड़ित परिवारों से शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मुलाकात की। आप नेताओं ने गांव में फैली अफवाहों का पुरजोर विरोध करते हुए समाज के सभी वर्गों से पहले की तरह भाईचारा बनाने व शांति कायम करने की अपील की। हरियाणा के सह प्रभारी नरेश बालयान ने कहा कि वर्तमान सरकार व प्रशासन की नाकामी के कारण ही गांव अटाली के हालात इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
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