फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एशियन गेम्स 2018: लक्ष्य के ‘लक्ष्य’ हासिल करते ही सोसायटी में बजने लगे ढोल, पीएम ने भी दी बधाई

Tue, 21 Aug 2018 11:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
1 of 10
asian games lakshay - फोटो : अमर उजाला
जकार्ता में चल रही एशियन गेम्स में शहर के छोरे लक्ष्य श्योराण ने रजत पदक पर निशाना लगा भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया है। लक्ष्य की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट पर उसे बधाई दी है। लक्ष्य ने मैंस ट्रैप इवेंट में पदक हासिल किया है। लक्ष्य के पदक जीतते ही सेक्टर-48 स्थित उनके घर पर जमकर ढोल बजे और परिजनों ने मुंह मीठा करवा एक दूसरे को बधाई दी।
विज्ञापन

2 of 10
asian games lakshay - फोटो : अमर उजाला
लक्ष्य श्योराण मूलरूप से जींद के रहने वाले हैं, मगर पिछले काफी समय से वह परिवार के साथ सेक्टर-48 लेक व्यू सोसायटी में रह रहे हैं। उनके पिता सोमवीर श्योराण की फरीदाबाद में ही हीरो होंडा बाइक की डीलरशिप है। लक्ष्य का सोमवार शाम को मुकाबला था। इस दौरान उन्होंने 45 में से 39 सही निशाने लगाते हुए रजत पदक पक्का किया। लक्ष्य के पदक हासिल करने के साथ ही सभी लोग खुशी से झूम उठे।
विज्ञापन

3 of 10
asian games lakshay - फोटो : अमर उजाला
लक्ष्य के पिता सोमवीर श्योराण ने कहा कि बेटे ने देश के लिए पदक जीता है। उसके बाद से उनकी छाती गर्व से चौड़ी हो गई है। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। पदक जीतने का पता चलते ही उनके पास जींद से रिश्तेदारों के बधाई फोन आने लगे। घर में दीवाली का सा माहौल है। परिवार व पड़ोस के लोग ढोल बजवाकर खुशी का इजहार कर रहे हैं। सोसायटी में मिठाईयां बांटी जा रही हैं।

4 of 10
asian games lakshay - फोटो : अमर उजाला
कर्णी सिंह में करते हैं शूटिंग
लक्ष्य के पिता सोमवीर श्योराण की जींद में हीरो मोटरसाइकिल की डीलरशिप है। सोमवीर श्योराण ने बताया कि पिछले करीब चार साल से लक्ष्य को फरीदाबाद से सटी डा. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण ले रहा है। तभी से वे लोग फरीदाबाद में सेक्टर-48 स्थित लेक व्यू सोसायटी में रह रहे हैं। परिवार के लोग बारी-बारी से फरीदाबाद आते-जाते रहते हैं।
विज्ञापन

5 of 10
asian games lakshay - फोटो : अमर उजाला
भाई ने दिया रक्षाबंधन का गिफ्ट
अगले सप्ताह रक्षाबंधन ने ऐसे में लक्ष्य की बहन यशवी अपने भाई के इस गिफ्ट से बेहद खुश है। यशवी का कहना ही भाई ने आज से पहले उसे इतना बेहतरीन गिफ्ट नहीं दिया है। वह भाई की उपलब्धि पर काफी खुश है।
विज्ञापन

6 of 10
asian games lakshay - फोटो : अमर उजाला
लक्ष्य की उपलब्धियां
लक्ष्य श्योराण ने साल 2014 में शूटिंग की शुरूआत की थी। साल 2015 में कुवैत में हुई एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीता था। इसके बाद इटली में आयोजित 13वीं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर, थाइलैंड में हुई सातवीं इंटरनेशनल जूनियर कप प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। साल 2016 में वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीता। जुलाई 2017 में जर्मनी में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। फिनलैंड में साल 2017 में हुई नौंवी जूनियर कप प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता। इसी साल मार्च में सिडनी में हुए जूनियर वर्ल्ड कप में भी लक्ष्य ने कांस्य पदक जीता।
विज्ञापन

7 of 10
asian games lakshay - फोटो : pti
एशियाई खेलों में लक्ष्य श्योराण ने देश को शूटिंग में मेंस ट्रैप इवेंट में 50 में 43 शॉट लगाकर देश को सिल्वर मेडल दिया है। लक्ष्य 12 अगस्त को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गया था और उस समय ही उसने अपने भारत कुमार पिता सोमबीर पहलवान को मेडल लाने का वादा किया था। सोमवार दोपहर को लक्ष्य ने चांदी पर निशाना लगाकर अपना वादा पूरा किया है। महज चार साल के शूटिंग कैरियर में लक्ष्य ने यह सफलता की कई इबारत लिखी हैं।

8 of 10
asian games lakshay - फोटो : pti
लक्ष्य के पिता शहर के जाने माने व्यवसायी हैं और दोपहिया वाहनों की एजेंसी चलाते हैं। लक्ष्य की ताई जींद नगर परिषद की चेयरमैन रह चुकी हैं। जींद नगर परिषद के उप प्रधान सुभाष जांगड़ा, पूर्व प्रधान विनोद आसरी ने लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान को बधाई दी।       
1991 में भारत कुमार बने लक्ष्य के पिता
लक्ष्य के घर में शुरू से ही खेलों के प्रति अच्छा माहौल है। लक्ष्य के पिता सोमबीर पहलवान 1991 में भारत कुमार रहे हैं। सोमबीर पहलवान के अनुसार वे बेटे के शूटिंग में जाने के पक्ष में नहीं थे। यह बहुत महंगा खेल है। लक्ष्य ने 2014 में एयर पिस्टल में करियर शुरू किया था, लेकिन बाद में उसने शॉट राइफल ट्रैंप को अपना लिया। आज उन्हें बेटे के फैसले पर खुशी है। लक्ष्य की छोटी बहन दसवीं कक्षा की छात्रा है।

9 of 10
asian games lakshay - फोटो : pti
विदेश में रहना पड़ता है भूखे पेट
सोमबीर पहलवान के अनुसार लक्ष्य शुद्ध रूप शाकाहारी है। विदेश में खेलते वक्त उसे खाने की काफी दिक्कत आती है और वह भूखे रहकर खेलता है। घर आने पर लक्ष्य दूध और लस्सी ज्यादा पसंद करता है। सोमबीर पहलवान के अनुसार लक्ष्य को घर का दूध व घी खिलाने के लिए आठ गाएं रखी हैं।
विज्ञापन

10 of 10
asian games lakshay - फोटो : pti
लक्ष्य को किया जाएगा सम्मानित
शूटिंग शुरू करने से पहले लक्ष्य इंडस स्कूल का छात्र रहा है। वह 11वीं कक्षा तक स्कूल में पढ़ा है, ऐसे में वह इंडस परिवार का सदस्य है और लक्ष्य ने देश को पदक दिलाकर जींद का नाम रोशन किया है। इंडस संस्थाओं के निदेशक सुभाष श्योराण के अनुसार जींद लौटने पर लक्ष्य को सम्मानि किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें