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अनाज मंडीः हर मंजिल पर पांच कमरे, हर कमरे में लगी थी मौत की मशीन, ऐसे लग गई आग

Wed, 11 Dec 2019 11:01 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली अनाज मंडी इलाके में रविवार को भयानक अग्निकांड का शिकार हुई चार मंजिला इमारत में एक या दो नहीं बल्कि एक बड़ी फैक्ट्री के बराबर मशीनों की 18 यूनिट काम कर रही थीं। क्राइम ब्रांच टीम की शुरुआती जांच में सामने आया है कि उस इमारत की हर मंजिल पर पांच कमरे थे और लगभग हर कमरे में मशीनों की एक यूनिट लगी हुई थी। इमारत में हर समय सौ से ज्यादा लोग रहते थे। पोस्टमार्टम के बाद 43 मृतकों में से 40 के शव मंगलवार शाम तक उनके परिजनों को सौंप दिए गए थे।
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- फोटो : पीटीआई
अपराध शाखा में तैनात इंस्पेक्टर आशीष दुबे की टीम फैक्टरी के मालिक रेहान के मैनेजर फुरकान को साथ लेकर मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे घटनास्थल पर पहुंची और डेढ़ घंटे तक वहां जांच की। फुरकान ने ही वहां मौजूद मशीनों और आदमियों की संख्या की जानकारी दी। जांच टीम फुरकान के जरिए मृतकों की पहचान कर रही है।
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- फोटो : पीटीआई
अपराध शाखा ने फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया और सभी फ्लोर की फोटो इमेजिंग कराई। इसके अलावा बिल्डिंग की पहली व दूसरी मंजिल की 3डी स्कैनिंग भी कराई गई। शुरुआती जांच में ये बात सामने आई कि सबसे पहले आग दूसरी मंजिल के बिजली मीटर में लगी थी और वहां से ऊपरी मंजिलों की ओर फैलती चली गई। जांच में पुलिस को मौके पर किसी भी कमरे से अंगीठी, हीटर, सिलिंडर व चूल्हा नहीं मिला है। उधर, रेहान का कहना है कि बिल्डिंग में घटनावाली रात कर्मचारियों ने कोई पार्टी आयोजित की होगी। इस कारण वहां इतने लोग मौजूद थे।

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- फोटो : पीटीआई
न्यायिक जांच या सीबीआई जांच नहीं : हाईकोर्ट
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अनाज मंडी अग्निकांड की किसी रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच या सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह जांच का प्रारंभिक चरण है और अधिकारियों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने याची वकील अवध कौशिक से कहा कि जांच में संबंधित विभाग से कोई गलती होती है तो एक निर्धारित समयावधि के बाद वह फिर से मामले की न्यायिक जांच के लिए नई याचिका दायर कर सकता है।
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- फोटो : पीटीआई
इसके साथ ही पीठ ने कहा, किसी भी याचिका को सिर्फ अखबार में पढ़कर घटना के एक-दो दिन बाद ही नहीं दाखिल किया जा सकता है। मामले की जांच के लिए अधिकारियों को समय दिया जाना चाहिए। सरकार में काम कैसे होता है, इसकी एक प्रक्रिया है। यह कोई एक आदमी का काम नहीं है। ऐसे में इस मामले में कोर्ट का हस्तक्षेप करना जल्दबाजी होगी।
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