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अनाज मंडी अग्निकांडः नानी के साथ पिता और चाचा का शव लेने पहुंचा आठ साल का अली

Tue, 10 Dec 2019 10:04 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के अनाज मंडी की फैक्ट्री में रविवार को लगी आग ने 43 जिंदगियां ले लीं। इस हादसे ने कई परिवार उजाड़ दिए व कई घरों के कमाऊ पूत ही छीन लिए। ऐसा ही एक परिवार है यूपी के मुरादाबाद जिले का जिसके दोनों कमाऊ पूत अनाज मंडी अग्निकांड में खत्म हो गए। तस्वीरों में देखिए इसी परिवार का सबसे छोटा सदस्य अली जब अपने पिता और चाचा का शव लेने पहुंचा तो क्या हुआ...
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- फोटो : अमर उजाला
अनाज मंडी हादसे में किसी ने बेटा तो किसी ने भाई खो दिया। भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार के इस खेल में कई जिंदगियां और परिवार तबाह हो गए। इस तबाही को झेलने वालों की चीखें अस्पताल में आने-जाने वाले हर शख्स के कानों में गूंज रही थीं। किसी का बच्चा रो रहा था तो किसी की मां।
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- फोटो : अमर उजाला
किसी के बुजुर्ग दादा कंपकंपाते हुए अपने लाडले के जाने का मातम मना रहा थे तो कुछ भ्रष्ट तंत्र को बदुआएं दे रहे थे। इसी बीच लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी के ठीक सामने लाल रंग की जैकेट में गुमसुम एक मासूम बैठा था। ठंड में मासूम को अपने सीने से लगाए एक बुजुर्ग महिला भी थी, जिनकी आंखों से मन की पीड़ा बाहर निकल रही थी।

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- फोटो : अमर उजाला
बातचीत में तकरीबन 8 वर्षीय उस बच्चे ने अपना नाम अली अहमद बताया। उसके पिता का नाम था इमरान अहमद। यह परिवार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के गांव कुरी रवाना का है। इस परिवार के दोनों ही कमाऊ बेटे अनाज मंडी हादसे में जान गवां चुके हैं। 35 वर्षीय इमरान और उसका 33 वर्षीय भाई इकराम की दम घुटने से मौत हो गई। इसी गांव के 20 वर्षीय समीर ने भी उसी इमारत में दम तोड़ दिया था। 
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- फोटो : पीटीआई
अपनी नानी के साथ बैठा अली अहमद भले ही मासूम है, लेकिन अपने पिता और चाचा की मौत होने का दर्द वह महसूस कर रहा था। मायूस चेहरे और सूखे होठ उसके गहरे दुख को बयां करने के लिए काफी थे। अली बताता है कि जब घर पर पता चला कि पापा और चाचा की मौत हो गई है तो हर कोई अचंभित था। पूरे गांव में हर कोई स्तब्ध था।
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- फोटो : पीटीआई
ये तीनों युवक बैग बनाने के कारखाने में काम करते थे। इमरान और इकराम के पिता जमील अहमद भी वहां मौजूद थे। इन्हीं की शिनाख्त के बाद सोमवार दोपहर को दोनों भाईयों का पोस्टमार्टम हुआ और शव परिजनों को सौंप दिए। इसके बाद परिजन एंबुलेंस में शव लेकर अपने गांव के लिए रवाना हुए।
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