किसी के बुजुर्ग दादा कंपकंपाते हुए अपने लाडले के जाने का मातम मना रहा थे तो कुछ भ्रष्ट तंत्र को बदुआएं दे रहे थे। इसी बीच लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी के ठीक सामने लाल रंग की जैकेट में गुमसुम एक मासूम बैठा था। ठंड में मासूम को अपने सीने से लगाए एक बुजुर्ग महिला भी थी, जिनकी आंखों से मन की पीड़ा बाहर निकल रही थी।