फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भक्त के सपने में आकर मां दुर्गा ने बताया था अपने प्रकट होने का स्थान, तब सामने आया ये मंदिर

Sun, 09 Oct 2016 04:59 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 12
jhandewalan mandir delhi
राजधानी दिल्ली के मध्य में एक ऐसा मंदिर है जो दिल्ली की पहचान बन चुका है। हम बात कर रहे हैं झंडेवाला मंदिर की जो झंडेवाली देवी को समर्पित एक सिद्धपीठ है। यहां नवरात्र के मौके पर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। अपने धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के कारण राज्य सरकार ने भी दिल्ली के प्रासिद्ध दर्शनीय स्थलों में इसे शामिल किया है।
ये भी पढ़ें:
PICS: घर में अकेले होने पर क्या-क्या करती हैं लड़कियां
देखिए क्‍या हुआ जब एक रात दिल्ली की सुनसान सड़क पर अकेली पड़ गई लड़की
क्या आप जानते हैं नाथूराम गोडसे ने क्यों की महात्मा गांधी की हत्या?
पूरा पैसा वसूलने के चक्कर में ऐसी 7 हरकतें कर ही बैठते हैं हम, क्या आपने कभी किया है ऐसा!
हत्यारे ने पुलिस को बताया 30 वार करने का सच, लाश की फोटो की थी व्हाट्सऐप
जानिए होश में आने के बाद पुलिस से क्या बोली जहर खाने वाली गायिका और डांसर सपना
विज्ञापन

2 of 12
jhandewalan mandir delhi
वैसे तो इस मंदिर में नवरात्र में लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं लेकिन ऐसा नहीं ‌है कि अन्य दिनों में यहां कम भीड़ होती है। झंडेवाली देवी के मंदिर में साल भर उत्सव सा ही माहौल रहता है। मंदिर में आने वाला प्रत्येक भक़्त यहां से मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति लेकर ही जाता है।
विज्ञापन

3 of 12
jhandewalan mandir delhi
झंडेवाला मंदिर का इतिहास 18वीं सदी के उत्तरार्ध से प्रारंभ होता है, जो अपने आप में ही बहुत दिलचस्प है। उसके बारे में बताने से पहले हम आपको ये बता दें कि आज जिस भीड़-भाड़ वाली जगह पर झंडेवाला मंदिर स्थित है वह हमेशा से ऐसी शोरगुल वाली जगह नहीं थी।

4 of 12
jhandewalan mandir delhi
आज जिस स्थान पर मंदिर स्थित है वहां पहले अरावली पर्वत श्रॄंखला की हरी भरी पहाडियां , घने वन और कलकल करते झरने बहते थे। अनेक पशु पक्षियों का यहां बसेरा था। इस शांत और रमणीय स्थान पर आसपास के निवासी सैर करने आया करते थे। ऐसे ही लोगों में चांदनी चौक के एक प्रसिद्ध कपड़ा व्यापारी श्री बद्री दास भी थे। श्री बद्री दास धार्मिक व्यक्ति थे और वैष्णो देवी के भक़्त थे। वे नियमित रूप से यहां पर सैर करने आते थे और ध्यान में लीन हो जाते थे।
विज्ञापन

5 of 12
jhandewalan mandir delhi
एक दिन वो रोजाना की तरह ही अपने ध्यान में मग्न थे‌ कि उन्हें ऐसी अनुभूति हुई कि वहीं निकट ही एक झरने के पास स्थित एक गुफा में कोई प्राचीन मंदिर दबा हुआ है। एक दिन फिर से उन्हें उसी जगह एक मंदिर दिखाई पड़ा और ये भी लगा कि कोई अंजानी शक्ति उन्हें इसे खोजने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
विज्ञापन

6 of 12
jhandewalan mandir delhi
इस अनोखी अनुभूति के बाद श्री बद्री दास ने उस स्थान को खोजने में ध्यान लगा दिया और एक दिन स्वप्न में दिखाई दिए झरने के पास खुदाई करते समय गहरी गुफा में एक मूर्ति दिखाई दी।
विज्ञापन

7 of 12
jhandewalan mandir delhi
यह एक देवी की मूर्ति थी परंतु खुदाई में मूर्ति के हाथ खंडित हो गए इसलिए उन्होंने खुदाई में प्राप्त मूर्ति को उसके ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए उसी स्थान पर रहने दिया और ठीक उसके ऊपर देवी की एक नयी मूर्ति स्थापित कर उसकी विधिवत प्राण प्रतिष्ठा करवाई।

8 of 12
jhandewalan mandir delhi
इस अवसर पर मंदिर के ऊपर एक बहुत बडा ध्वज लगाया गया जो पहाडी पर स्थित होने के कारण दूर-दूर तक दिखाई देता था जिसके कारण कालान्तर में यह मंदिर झंडेवाला मंदिर के नाम से विख्यात हो गया।

9 of 12
jhandewalan mandir delhi
खुदाई में प्राप्त मूार्ति जिस स्थान पर स्थापित है वह स्थान गुफा वाली माता के नाम से विख्यात हो गया। गुफा वाली देवी जी के खंडित हाथों के स्थान पर चांदी के हाथ लगाये गए और इस मूर्ति की पूजा भी पूर्ण विधि विधान से की जाने लगी।

10 of 12
jhandewalan mandir delhi
वहीं पर खुदाई में प्राप्त एक चट्टान के ऊपर बने शिवलिंग को भी स्थापित किया गया है जिस पर नाग-नागिन का जोडा उकेरा हुआ है। यह प्राचीन गुफा वाली माता और शिवलिंग भी भक़्तों की श्रद्धा का केंद्र है। इसी गुफा में जगाई गई ज्योतियाँ भी लगभग आठ दशकों से अखंड रूप में जल रही है।

11 of 12
jhandewalan mandir delhi
मंदिर की स्थापना के साथ ही इस स्थान पर भक़्तों का आना जाना प्रारंभ हो गया और धीरे-धीरे समय के साथ मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया।
विज्ञापन

12 of 12
jhandewalan mandir delhi
बद्री दास जी ने जोकि अब तक भगत बद्री दास के नाम से विख्यात हो चुके थे, आसपास की जमीनों को मंदिर के विस्तार के लिए खरीद लिया। भगत बद्री दास ने अपना शेष जीवन मां झंडेवाली की सेवा में ही समर्पित कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें