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4 घंटे तक चली गरमागरम बहस के बाद अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का बिल हुआ पास

Thu, 05 Oct 2017 10:21 AM IST
बयूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने का बिल पेश किया। करीब 4 घंटे तक चली गरमागरम बहस के बाद सदन ने बिल को ध्वनिमत से पास कर दिया। पूरी चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने बिल को शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए इसे कानून बनाने की बात कही। वहीं, विपक्ष के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए बिल की खामियों का जिक्र किया।
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अतिथि शिक्षक व सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं का नियम विधेयक-2017 सदन में पेश करते वक्त कहा कि दिल्ली सरकार की कैबिनेट के पास अधिकार है कि वह अहम मसलों पर स्वतंत्र होकर फैसला ले सकती है। इसी तरह का फैसला नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री ने भी लिया था। सिसोदिया के मुताबिक, वह प्रधानमंत्री को ही फॉलो कर रहे हैं। लेकिन उनके फैसले से कई लोगों की मौत हो गई। जबकि दिल्ली सरकार शिक्षकों को नियमित करके हजारों परिवारों को जीवन दे रही है।
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manish sisodia
सिसोदिया ने कहा कि बिल के कानून बनने के बाद 15 हजार शिक्षकों की नौकरी स्थायी हो जाएगी। उपराज्यपाल की तरफ से उठाए गए सवालों पर सिसोदिया ने कहा कि पत्र मिलने के बाद बुधवार को एक बार फिर कैबिनेट की बैठक हुई। उपराज्यपाल ने दो मसलों पर सवाल किया था। एक बिल सर्विसेज से जुड़ा है, जो दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। वहीं, दूसरा इसे तैयार करते वक्त कानून विभाग की सलाह नहीं ली गई।

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मनीष सिसोदिया का शुक्ल पक्ष - फोटो : SELF
सिसोदिया ने बताया कि कैबिनेट ने माना कि शिक्षक के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। यह मसला सेवाओं से नहीं जुड़ा है। वहीं, कुछ महीने पहले दिल्ली सरकार ने 150 कश्मीरी माइग्रेेंट को स्थायी किया था। उपराज्यपाल ने उस प्रस्ताव पर कोई एतराज नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया किया कि अगर वह सही था तो हजारों अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने का फैसला कैसे गलत हो सकता है। उपराज्यपाल की राय से सरकार इत्तेफाक नहीं रखती।
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कानून विभाग व वित्त विभाग से की गई है चर्चा
मनीष सिसोदिया ने कहा कि विधानसभा में बिल पेश होने से कुछ घंटे पहले पत्र भेजकर बिल पर पुनर्विचार करने की बात कह उपराज्यपाल ने विधानसभा का अपमान किया है। विधानसभा में सरकार ने कैबिनेट से पास बिल पेश किया है, जबकि कोई भी विधायक विधानसभा में बिल लाने के लिए स्वतंत्र है। जो बिल लाए गए हैं वह पूरी प्रक्रिया के तहत हैं।
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दूसरी तरफ विजेंद्र गुप्ता ने बिल की वैधानिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 15,000 शिक्षकों का मामला है। लेकिन उत्तर प्रदेश में 1,70,000 से ज्यादा शिक्षा मित्रों को स्थायी करने पर अदालत ने रोक रखी है। ऐसे में यह बिल भी अदालत में नहीं टिक सकेगा। क्योंकि बिल तैयार करने मेें प्रक्रिया का पालन सरकार ने नहीं किया है। गुप्ता ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष की नीयत साफ नहीं है। वह इस मसले पर सिर्फ सियासत कर रहे हैं। इसका जवाब देते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि विपक्ष की तरफ से उठाए गए सवाल आधी-अधूरी जानकारी पर आधारित हैं। इसमें तथ्यों का अभाव है। दिल्ली सरकार ने कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखकर बिल तैयार किया है। सदन को इसे पास करना चाहिए। चर्चा खत्म होने के बाद विधान सभा अध्यक्ष ने इसे पास करने पर सदन की सहमति मांगी। इसे ध्वनि मत से पास कर दिया गया।
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