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ऐसा गुस्सा कि डीसीपी पर ही छोड़ दिया हाथ

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कानून की रक्षा करने वाली पुलिस पिछले पांच माह में छह बार पिट चुकी है। पुलिस पर सिर्फ बदमाशों ने ही नहीं, आम आदमी और मंत्री के रिश्तेदारों ने भी हमला बोला। बदमाशों को छोड़कर खुद पर हुए अन्य मामलों में पुलिस एक भी गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।
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ऐसा गुस्सा कि डीसीपी पर ही छोड़ दिया हाथ

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राजनैतिक और सामाजिक दबाव के चलते हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से पुलिस वालों का मनोबल गिर रहा है तो अराजक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। अपराध पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही शहर की पुलिस अपनी रक्षा भी नहीं कर पा रही है।
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आम आदमी के दिल से पुलिस का खौफ दूर होता जा रहा है। अव्यवस्था से नाराज हाईवे जाम करने वाले जरा सी बात पर नाराज होकर पुलिस पर हमला बोल देते हैं तो कहीं सार्वजनिक स्थान पर नशेबाजी कर रहे कथित संभ्रांत खलल पड़ने पर पुलिस के साथ अभद्रता पर उतर आते हैं।

ऐसा गुस्सा कि डीसीपी पर ही छोड़ दिया हाथ

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यहां तक कि चोर और बदमाश भी पुलिस टीम पर हमला करने से नहीं हिचकते। फरवरी से अब तक पुलिस टीम पर छह बार हमले हुए। पुलिस ने हमलावर चोर और बदमाशों को तो ढूंढ कर गिरफ्तार कर लिया लेकिन अन्य मामलों में एक भी गिरफ्तारी नहीं की गई।
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ऐसा गुस्सा कि डीसीपी पर ही छोड़ दिया हाथ

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एसएचओ स्तर के एक अधिकारी का कहना है कि अधिकतर मामलों में मोर्चे पर सिपाही, एएसआई और एसएचओ स्तर के अधिकारी ही लगते हैं और आम जनता के गुस्से का शिकार बनते हैं। मारपीट के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से पुलिस कर्मियों का मनोबल गिर रहा है, यही वजह है कि अब भीड़ बढ़ने पर पुलिस सुरक्षात्मक रुख अपनाती है।
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