उसके उम्र के बच्चे जहां वीडियो गेम और कारों से खेलकर बड़े होते हैं उस उम्र में रीयूबेन पॉल मैट्रिक्स की गुत्थियों को सुलझा रहा है। तीसरी क्लास में पढ़ने वाला पॉल एक नामी हैकर, ऐप डेवलपर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और सबसे बड़ी बात एक गेम विकसित करने वाली कंपनी प्रूडेंट गेम्स का सीईओ है। (खबरः टाइम्स ऑफ इंडिया, फोटो साभारः फेसबुक प्रोफाइल)
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खेलने की उम्र में गेम बनाने वाली कंपनी का CEO है ये नन्हा हीरो
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हैकिंग की दुनिया उसका नाम बहुत आदर से लिया जाता है और अक्सर ही वो बड़े-बड़े विद्वानों व सैकड़ों की भीड़ को साइबर सिक्योरिटी और हैकिंग के विषय पर पोडियम के पीछे छिपी कुर्सी पर खड़े होकर संबोधित करता है।
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पॉल को ऐसा इसलिए करना पड़ता है क्योंकि वो अभी मात्र 9 साल का है और वह खुद माइक तक नहीं पहुंच पाता है। बृहस्पतिवार को टेक्सास से आए रियूबेन पॉल ने ग्राउंड जीरो सम्मिट 2015 में साइबर सिक्योरिटी पर विद्वानों को संबोधित किया।
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बता दें कि ग्राउंड जीरो सम्मिट साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और शोधकर्ताओं की दुनिया में होने वाली सबसे बड़ी बैठक है। बता दें कि पिछले साल पॉल ने 14 नवंबर यानी बाल दिवस पर अपना संबोधन दिया था। लेकिन इस बार वो बच्चों को साइबर सिक्योरिटी के बारे में पढ़ाने के लिए 'विशेष राजदूत' बनकर आया है। यही नहीं उसके ऐसे ही कई भाषण और भी हैं।
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चार दिन के इस ग्राउंड जीरो सम्मिट का आयोजन दिल्ली के अशोका होटल में किया गया है। साइबर सिक्योरिटी के विशेषज्ञों की फौज वाले इस सम्मिट की शुरूआत गृहमंत्री राजनाथ सिंह के भाषण से हुई।
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राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में विशेषज्ञों का ध्यान सोशल मीडिया से हो रहे नुकसान की ओर भी दिलाया और कहा कि उन्हें इसे रोकने के बारे में सोचना भी चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहा कि साइबर क्राइम को रोकना बेहद मुश्किल है क्योंकि इसका दायरा विश्वव्यापी है।
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रियूबेन पॉल इस सम्मिट में भाग लेने वाला सबसे छोटा प्रतिनिधि है। उसने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि वो क्रिडेंशियल हारवेस्टिंग से अपने दांत मैदान में काटता है। यह एक टेक्निकल टर्म है जो पासवर्ड चुराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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अपने सुपरहीरो स्पाइडर मैन का एक कथन का उपयोग करते हुए वो अपनी हैकिंग की काबिलियत को कैसे इस्तेमाल करता है ये बताता है। वो कहता है कि, 'अच्छी हैकिंग की कला से आपको काफी शक्तियां मिलती हैं और शक्तियां आ जाने के बाद आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।'
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जहां 9 साल का पॉल बड़ा होकर एक अच्छा साइबर जासूस बनना चाहता है वहीं सम्मिट ऐसे लोगों से पटा पड़ा था जिन्होंने साइबर की दुनिया में अपना बड़ा नाम कमा लिया है।
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सम्मिट में आए एक हैकर ने बताया कि उसने पहली बार अपने कॉलेज के सिस्टम को हैक कर लिया था ताकि वो जान सके कि ग्रैजुएशन में उसके कितने नंबर हैं। हर्श शाह नाम के हैकर ने बताया कि उसने अपने कॉलेज के वाई-फाई और आई सिस्टम को ही हैक कर लिया था ताकि कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय ना हो सके।
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एक एथिकल हैकर इंदरजीत ने बताया कि उसने एक बैंक के ऑनलाइन पासबुक प्रिंटिंग टूल में कुछ कमियां खोजी थीं।
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जितेन जैन जो इंडियन इंफोसेक कॉन्सोर्टियम के सीईओ हैं और इस सम्मिट के आयोजक हैं ने बताया कि इस सम्मिट के आयोजन का मकसद सभी हैकरों और साइबर विशेषज्ञों को एक छत के नीचे लाना है जिससे देश के साइबर सिक्योरिटी पर शोध किया जा सके। पिछले साल इन विशेषज्ञों ने देश के डिफेंस से जुड़े न्यूज साइट्स में मालवेयर और वायरस ढूंढे थे।