देश भर में स्टूडेंट पॉलिटिक्स के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है डीयू कैंपस। आजकल इस कैंपस में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। (सभी फोटो- जीपॉल/अमर उजाला)
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डीयू पर चढ़ा इलेक्शन का बुखार, देखिए क्या हुआ हाल
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दिल्ली में 50 कॉलेजों के लगभग डेढ़ लाख छात्र इस इलेक्शन में भाग लेते हैं। यहां के छात्र संगठन को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) के नाम से जाना जाता है।
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बुधवार को 2014-2015 के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामांकन की आखिरी तारीख थी। डूसू के चार पदों के लिए 144 उम्मीदवारों ने नामांकन भरा है।
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यह इलेक्शन न सिर्फ कैंपस के लिए बल्कि देशभर के लिए महत्व का होता है क्योंकि यहां देश के हर हिस्से के छात्र पढ़ने के लिए आते हैं।
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डीयू का इलेक्शन देश की राजनीतिक हवा को भांपने का एक पैमाना भी माना जाता है। यही कारण है कि सभी बड़े राजनीतिक दल इस इलेक्शन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।
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दिल्ली में डीयू के साथ एक और सेंट्रल यूनिवर्सिटी जेएनयू में भी छात्र संगठन के चुनाव होने हैं। दोनो ही कैंपस में मतदान की तारीख 12 सितंबर रखी गई।
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कैंपस में मुख्य मुकाबला बीजेपी की छात्र शाखा एबीवीपी और कांग्रेस की एनएसयूआई के बीच माना जा रहा है। फिलहाल दोनों ही पार्टियों ने अपना पूरा जोर लगा रखा है।
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डीयू के छात्र संगठन में अब तक दस महिला अध्यक्ष रह चुकी हैं। जिनमें सबसे पहला नाम अंजू सचदेवा का है। इनके बारे में खास बात है कि ये निर्दलीय चुनाव लड़ीं और विजयी रहीं।
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इस वक्त केंद्रीय सरकार में वित्त और रक्षा जैसे दो महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले अरुण जेटली ने 1975-75 में डीयू से ही अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।