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दोस्तों ने खोले योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक जीवन के 'राज'

Mon, 20 Mar 2017 02:05 PM IST
चंद्रमोहन शुक्ला/ अमर उजाला, कोटद्वार
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कोटद्वार महाविद्यालय में बीएसी की पढ़ाई के दौरान दोस्तों के साथ टूर में जाते योगी आदित्यनाथ (सिर में लाल रंग का कपड़ा बांधे) - फोटो : file photo
योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रांत के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने से उनके छात्र जीवन के साथी खुशी से गदगद हो उठे। उत्तर प्रदेश के नए ‌मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दोस्तों ने उनके छात्र जीवन के कई राजों से पर्दा उठाया।
 
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योगी आदित्यनाथ
छात्र जीवन के साथियों ने योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर कोटद्वार में जमकर जश्न मनाया और उम्मीद जताई कि इसका लाभ निश्चित रुप से उत्तराखंड को मिलेगा। उनका कहना है कि उत्तराखंड से सटे यूपी के जिन गांवों के सरोकार उत्तराखंड से जुड़े हैं, उन्हें उत्तराखंड राज्य में मिलाने की कवायद परवान चढ़ेगी।
 
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yogi - फोटो : amar ujala
इस मौके पर उन्होंने अजय मोहन सिंह बिष्ट (मूल नाम) के योगी आदित्यनाथ बनने के सफर पर अनुभव साझा किए। गढ़वाल सभा के महासचिव एवं शिक्षाविद् डा. पद्मेश बुड़ाकोटी ने बताया कि वर्ष 1989 में अजय मोहन बिष्ट ने राजनीति का ककहरा कोटद्वार से ही सीखा। यह दौर रामजन्म भूमि आंदोलन का था।
 

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याेगी अादित्यनाथ
पूरे देश में छात्र शक्ति नई अंगड़ाई ले रही थी। कोटद्वार भी इससे अछूता नहीं था। विद्यार्थी परिषद के माध्यम से अजय बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) समेत कई छात्र राष्ट्रीयता के इस महा अभियान से जुड़ गए। इस दौरान अजय बिष्ट ने एबीवीपी की विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में प्रत्यक्ष भागीदारी की, जिससे उनका व्यक्तित्व निखर गया।
 
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योगी आदित्यनाथ, यूपी सीएम, योगी का शपथग्रहण - फोटो : SELF
कोटद्वार महाविद्यालय में ही राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों के प्रति उनकी स्पष्ट सोच विकसित हुई। छात्र, समाज और देशहित में कार्य करने का जज्बा भी उन्हें कोटद्वार की छात्र राजनीति से ही मिला। रामजन्म भूमि आंदोलन का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। नतीजतन वह इस आंदोलन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने लगे। उनके साथी अशोक सिंह भंडारी बताते हैं कि राज जन्म भूमि आंदोलन से पहले उनकी पहचान एक संकोची और बहुत कम बोलने वाले युवक के रुप में थी।
 
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yogi adityanath - फोटो : file photo
उनके छात्र जीवन के साथी दीप प्रकाश भट्ट बताते हैं कि वह छात्र जीवन में लगनशील और जुझारू प्रवृत्ति के रहे हैं। 1992 में वह बीएससी करने के बाद वह कोटद्वार से गोरखपुर जरूर चले गए, लेकिन कोटद्वार और अपनी मातृभूमि के प्रति उनके मन में लगाव कम नहीं हुआ। यही वजह रही कि संन्यास ग्रहण करने और इसके बाद गोरक्षापीठ गोरखपुर के उत्तराधिकारी बनने के बाद उन्होंने यमकेश्वर के विथ्याणी में महायोगी गुरु गोरखनाथ महाविद्यालय की स्थापना की। उनके छात्रजीवन के अन्य साथी धनंजय रतूड़ी, अनूप नेगी, मनीष गर्ग, हेमंत गर्ग, अमिताभ अग्रवाल, विनोद रावत, विनीता भट्ट, हरीश सती ने उम्मीद जताई कि योगी आदित्यनाथ के यूपी के सीएम बनने से उत्तराखंड को भी लाभ मिलेगा। 
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