वह अक्सर मुझसे कहा करते थे कि रोजगार के अभाव में पैतृक स्थल को छोड़ युवा शहर का रुख कर रहे हैं। वह चाहते थे कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे इन युवाओं को गांव छोड़कर न जाना पड़े। इसी क्रम में स्व. आनंद सिंह बिष्ट ने युवतियों को शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े, इसके लिए एक प्राइवेट महाविद्यालय की स्थापना की।