भाजपा के आक्रामक नेता के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के कॉलेज फ्रेंड ने कुछ ऐसी बातें बताई जिन्हें पढ़कर आप आज के योगी की कल्पना भी नहीं कर सकते। आइए जानते हैं देश के सबसे बड़े जिले की बादशाहत संभाल रहे योगी आदित्यनाथ के जीवन की कुछ अनकही बातें...
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सीएम योगी आदित्यनाथ
योगी आदित्यनाथ के कॉलेज के दोस्त विपिन बनियाल (हाल में अमर उजाला प्रमुख संवाददाता) ने उनको जन्मदिन की बधाई दी और बताया कि उत्तराखंड के यमकेश्वर में पंचूड़ गांव में जन्मे योगी आदित्यनाथ ने हायर एजूकेशन के लिए नब्बे के दशक में कोटद्वार डिग्री कॉलेज में एडमिशन लिया था।
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योगी
- फोटो : अमर उजाला
यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत होना माना जाता है। कोटद्वार डिग्री कॉलेज से 1991 में अजय सिंह बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) ने एबीवीपी के बागी के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
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सीएम योगी आदित्यनाथ
अजय सिंह बिष्ट उस वक्त कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में महा सचिव पद के लिए एबीवीपी से टिकट चाहते थे। वह यहां से बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे। विपिन बनियाल से उनकी दोस्ती छात्रसंघ चुनाव के वक्त हुई। दोनों एबीवीपी से जुड़े थे।
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योगी आदित्यनाथ
एबीवीपी ने उन्हें टिकट न देकर अन्य किसी को टिकट दिया। जिसके बाद योगी ने एबीवीपी के बागी के तौर पर चुनाव लड़ा। उस वक्त इनकी बहुत मानमनोव्वल की गई। लेकिन समर्थकों की जिद के आगे वह कुछ न कह सके और बुरी तरह हार गए। दूरस्थ गांव से आए योगी अपनी अलग पहचान बनाने के लिए यह चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन हार के बाद योगी अंदर से बेहद टूट गए। इस चुनाव में अरुण तिवारी ने जीत दर्ज की थी और योगी पांचवे नंबर पर थे।
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योगी आदित्यनाथ
- फोटो : Getty
चुनाव नतीजों के तुरंत बाद कोटद्वार में योगी जहां किराए पर रहते थे वहां चोरों ने धावा बोल दिया। इस कारण भी योगी की हिम्मत जवाब दे गई और वह दुखी मन के साथ अपने मामा महंत अवैद्यनाथ के पास चले गए। दो साल मामा के पास रहने के बाद योगी ने गोरखपुर का रुख किया। जहां से योगी के जीवन को नई दिशा मिली।
विपिन बनियाल ने बताया कि जैसे योगी आज आक्रामक दिखाई देते हैं कॉलेज के दिनों में वह बिल्कुल ऐसे नहीं थे। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब 1991 में एबीवीपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह शांत हो गए थे। लेकिन समर्थकों की जिद पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। वह बेहद चुपचुप रहने वाले और दूसरे लोगों से कम मेलजोल रखने वाले थे।