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अलविदा 2019: देशभर में सुर्खियां बन गईं उत्तराखंड की ये घटनाएं, दून से दिल्ली तक मच गया था हड़कंप

Tue, 31 Dec 2019 04:28 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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साल 2019 अब अलविदा कहने वाला है। लेकिन इस साल में उत्तराखंड में हुई कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो देशभर में चर्चा का विषय बन गईं। कुछ घटनाएं तो ऐसी थीं जिन्होंने दून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया। कोई राजनीति के शीर्ष पर पहुंचा तो किसी ने अपनी बहादुरी से सबको हतप्रभ कर दिया। वहीं कुछ बहादुर बेटे सबकी आंखे नम कर दुनिया को अलविदा कह गए। 
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चैंपियन का तमंचे पर डिस्को वीडियो हुआ था वायरल
बता दें कि 10 जुलाई 2019 को सोशल मीडिया पर भाजपा विधायक चैंपियन का एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में चैंपियन दोनों हाथों में हथियार लेकर साथियों के साथ नाचते, अश्लील शब्दों का प्रयोग करते और उत्तराखंड को लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे थे।
उनके इस वीडियो ने दून से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी से लेकर सभी दिग्गज नेताओं ने उनके इस वीडियो को शर्मनाक बताया। तभी से उन पर निष्कासन की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया चल रही थी। इसके बाद विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
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भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय कुमार पर लगा था मीटू का आरोप
साल 2018 के अंत में भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता ने उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजय कुमार पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस मामले की सारी जांच साल 2019 में हुई तो पूरे साल यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक सुर्खियों में छाया रहा। वरिष्ठ नेताओं को शिकायत के बाद भी संजय कुमार व अन्य के खिलाफ कार्रवाई न होने पर पीड़िता ने ‘अमर उजाला’ कार्यालय आकर अपनी पीड़ा बताई थी। पीड़ित ने यौन उत्पीड़न संबंधी साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे। मीटू का यह मामला ‘अमर उजाला’ की सुर्खियां बना तो भाजपा संगठन में हड़कंप मच गया था। मीटू प्रकरण का खुलासा होने के छह दिन बाद प्रदेश महामंत्री (संगठन) संजय कुमार को पद से हटाने की अधिकारिक घोषणा कर दी। 

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गुलदार से लड़कर भाई को बचाने वाली राखी बनी मिसाल
छह अक्टूबर 2019 को एक बेटी की बहादुरी देख हर कोई हतप्रभ था। पौड़ी गढ़वाल की बेटी राखी ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने चार साल के भाई की जान गुदार से बचाई थी। अब राखी को उसकी बहादुरी का इनाम भी मिलेगा। वह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होगी। राखी को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उसे सम्मानित करेंगे। इसके साथ ही वह तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्षों से मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री से भी उसकी मुलाकात होगी। राखी सेना में जाकर देश रक्षा करने का सपना देखती है। 
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राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे ये दो राजनेता 
साल 2019 उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से भी अच्छा रहा। इस साल में दो नेताओं रमेश पोखरियाल निशंक और भगत सिंह कोश्यारी ने प्रदेश का मान बढ़या। एक सितंबर को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। बता दें कि अक्टूबर 2001 में भाजपा आलाकमान ने कोश्यारी को स्वामी के उत्तराधिकारी के रूप में मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। कोश्यारी केवल पांच महीने ही मुख्यमंत्री रहे। 2002 से 2007 तक वे उत्तराखंड विधानसभा में नेता विपक्ष भी रहे। वर्ष 2008 से 2014 तक वे उत्तराखंड से राज्यससभा के सदस्य चुने गए थे। वहीं 30 मई को उत्तराखंड के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशं को पीएम मोदी की कैबिनेट में जगह मिली थी। निशंक को मानव संसाधन एवं विकास मंत्री बनाया गया। बता दें कि निशंक साल 2000 में उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद प्रदेश के पहले वित्त, राजस्व, कर, पेयजल सहित 12 विभागों के मंत्री बने। वर्ष 2007 में उत्तराखंड सरकार में चिकित्सा स्वास्थ्य, भाषा तथा विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री बने। इसके बाद उन्हें सीएम चुना गया।
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छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश
साल 2019 में एसआईटी ने करीब 500 करोड़ रुपये के चर्चित छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया। समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2012 से 2013 और वर्ष 2015 से 2016 के बीच उत्तराखंड के शिक्षण संस्थानों में एससी-एसटी और ओबीसी को फीस प्रतिपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये दिए थे। लेकिन, यह पैसा छात्रों तक नहीं पहुंचा। बल्कि शिक्षण संस्थानों के खातों में पहुंची। एसआईटी की कार्रवाई की जद में अब तक निजी शिक्षण संस्थानों के 13 लोग आ चुके हैं। निजी शिक्षण संस्थानों के अलावा समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीता राम नौटियाल, आईटी सेल के संयुक्त निदेशक अनुराग शंखधर एवं तीन सहायक समाज कल्याण अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी अब तक जिले में अलग अलग 26 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा चुकी है।
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पुलवामा हमले में जाबांज बहादुरों ने दी थी शहादत
साल 2019 के फरवरी में हुए पुलवामा हमले में उत्तराखंड के भी कई बहादुर बेटों ने अपनी शहादत दी थी। उनकी शहादत पर पूरा प्रदेश ही नहीं पूरे देश रोया था। शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को बचपन से ही सेना में जाने का बेहद जुनून था। पति की शहादत पर पत्नी शहीद पति को देख गर्व से भर गईं थीं। अंतिम संस्कार के दौरान पहले उन्होंने अपने शहीद पति का माथा चूमा, बोला आई लव यू...जय हिंद मेरे हीरो। मेजर विभूति अपनी शादी के दस महीने बाद ही देश सेवा में शहीद हो जए थे। 

देहरादून निवासी मेजर चित्रेश सिंह कश्मीर के राजौरी में आईईडी धमाके में शहीद हो गए। मां बेटे के सिर सेहरा सजाने की तैयारी कर रही थी, लेकिन शहादत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। चित्रेश की शादी की लगभग सारी तैयारियां हो चुकी थीं। लेकिन शादी से दस दिन पहले ही उन्होंने शहादत दे दी। मऊ में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने 25 बम डिफ्यूज कर उत्तम अधिकारियों में नाम शामिल किया था।

सीआरपीएफ के जवान हेमराज मीणा ने भी इसी हमले में अपनी शहादत दी थी।  शहीद हेमराज ने करीब 18 साल पहले सीआरपीएफ में नौकरी शुरू की थी और 61वीं बटालियन में सेवा दे रहे थे। रानीखेत के पीपली का रहने वाले वीरेंद्र, देहरादून निवासी सीआरपीएफ के एएसआई मोहनलाल रतूड़ी की शहादत ने भी देश को रुलाया।
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एनएच 74 घोटाले में दो आईएएस हुए थे सस्पेंड
करीब 400 करोड़ रुपये के एनएच-74 मुआवजा घोटाले में साल 2018 के अंत में दो आईएएस अधिकारी पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव को सस्पेंड किया गया था। इसके बाद साल 2019 में यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो पूरे साल यह मामला सुर्खियों में बना रहा। हालांकि इसी साल दोनों अधिकारियों को बहाल कर दिया गया है। इस पूरे मामले में अब तक 22 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। घोटाले में अब तक दो आईएएस अफसरों समेत कुल सात प्रशासनिक अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिर चुकी है। आठ पीसीएस अफसरों को सरकार पहले ही निलंबित कर चुकी है। मामले में एक एसडीएम और तहसीलदार जेल में हैं। इसके अलावा अलग-अलग मामलों में करीब 15 करोड़ रुपये की वसूली भी हो चुकी है।
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