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Dehradun: शक्ति का शंखनाद...अमर उजाला संवाद में महिलाओं ने साझा किए अनुभव...जज्बे और बहादुरी से भरा जोश

Sat, 08 Mar 2025 06:18 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। और जज्बे, बहादुरी से जोश भरा। 

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अमर उजाला की ओर से किया संवाद का आयोजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अमर उजाला की ओर से महिलाओं के लिए विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने जज्बे और बहादुरी से न सिर्फ जोश भरा बल्कि अपने अनुभव से अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।

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चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ते कदम विषय पर आधारित कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, थिएटर, कला, उद्यमिता समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने अपनी सफलता की यात्रा के दौरान आई चुनौती और समाज में हुए सकारात्मक बदलाव पर खुल कर बात की। इस मौके पर कविता प्रस्तुत कर कहा, शक्ति का शंखनाद कर, मुक्ति का जयनाद कर, आत्मज्योति से प्रखर-प्रखर, किरण-किरण तू बिखर...

महिलाओं का सफर जारी है...
साहित्यकार बीना बेंजवाल ने कहा, बीते सालों में पहले की तुलना में शिक्षा में बहुत बदलाव आए हैं। पहले महिलाओं के लिए सिर्फ दो ही क्षेत्र होते थे। एक शिक्षा और दूसरा स्वास्थ्य, लेकिन बदलते समय के साथ अब महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। हालांकि इस दौरान कई चुनौतियां भी आई हैं पर उन चुनौतियों पर महिलाओं ने विजय हासिल की है और अभी सफर जारी है।

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मार्शल आर्ट समय की जरूरत

पुलिस विभाग की चीफ कोच अंजना रानी सपकाल ने कहा, मार्शल आर्ट समय की जरूरत है। बच्चों को मानसिक तौर पर फीट रखने के लिए मार्शल आर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंजना का सपना है कि जरूरतमंद बच्चों तक खेल पहुंचे और वह देश के साथ उत्तराखंड का नाम रोशन करें। इसके लिए वह जरूरतमंद बच्चों को ड्यूटी के बाद निशुल्क प्रशिक्षण देती हैं।

महिला-पुरुष के बिना संभव नही है विकसित भारतदून विवि के ट्रेनिंग-प्लेसमेंट विभाग की निदेशक डॉ. स्वाति बिष्ट ने कहा, महिला-पुरुष के बिना विकसित भारत का सपना सकार होना संभव नही है। हमें सबसे पहले लैंगिक समानता के प्रति समाज को जागरूक करना होगा। हर किसी के पास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत है। बस जरूरत है अपनी क्षमता को पहचान कर आगे आने की। दुनिया क्या कहेगी.. इस विचार से बाहर आना होगा।

महिला-पुरुष से ही बनता है संपूर्ण मनुष्य

यूथ रॉक्स फाउंडेशन संस्था की संस्थापक डॉ. दिव्या नेगी ने कहा, महिला-पुरुष से ही संपूर्ण मनुष्य बनता है। अपने नजरिए को बदल हम देश को महान बना सकते हैं। लैंगिक समानता के साथ हमें आत्ममूल्यों को पहचानना होगा। उन्होंने कहा, बदलते समय के साथ महिलाओं ने हर क्षेत्र में खुद को स्थापित किया है और किसी भी समाज व राष्ट्र के विकास के लिए महिला-पुरुष का एक साथ आगे आना बहुत जरूरी है।

अपनी सुरक्षा के लिए हर दिन रहना होगा सतर्क

सरकारी महिला अधिवक्ता जया ठाकुर ने कहा, महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए हर दिन सतर्क रहना होगा। बच्चों को अच्छा व बुरे स्पर्श के बारे में शुरूआत से ही जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा, किसी भी क्षेत्र में काम करने के लिए चुनौतियां आती हैं, लेकिन उन चुनौतियां से लड़े बिना ही सामना करने से सफलता मिलेगी।

हमारी वजह से कोई बचता है तो अच्छा लगता है

अग्निशमन विभाग में कार्यरत कविता चौहान व वर्षा चौहान ने कहा, हमारी वजह से किसी की जान बचती है तो बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में कई तरह की चुनौतियां हैं। 24 घंटे व सातों दिन की नौकरी में हमारा मकसद लोगों को बचाना होता है। पहले इस क्षेत्र में सिर्फ पुरुष ही कार्य करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ अब महिलाएं भी इस क्षेत्र में आगे आ रही हैं।

अभी बाकी है कई सीमाओं को तोड़ना

उद्यमी अभिलाषा गुप्ता ने कहा, हर क्षेत्र में आगे आने के लिए बहुत सी चुनौतियां का सामना करना पड़ता है। लेकिन परिवार के सहयोग से महिलाओं ने उन सभी चुनौतियों से पार पाकर अपना मुकाम बनाया है। लेकिन अभी बहुत सी सीमाओं को तोड़ना बाकी है और उन सीमाओं को तोड़ने के लिए महिलाओं में पूरी क्षमता है।

महिलाओं में है नेतृत्व करने की क्षमता

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सुधा कुकरेती ने कहा, महिलाओं में नेतृत्व करने की क्षमता है। नारी को ईश्वर ने श्रेष्ठ बनाया है और इसकी तुलना करने की जरूरत नहीं है। उन्हों ने कहा, महिलाओं ने सभी सीमाओं को तोड़ हर क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। यही वजह है कि पुरुषों के साथ मिलकर महिलाएं भी राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे रही हैं।

मां से मिली संघर्ष कर सफलता पाने की प्रेरणादून की पहली ई-रिक्शा चालक गुलिस्ता अंसारी ने कहा, परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से बचपन से तंगी का जीवन बिताया। लेकिन मां ने संघर्ष कर छह बहनों का पालन-पोषण किया। मां के उसी संघर्ष से हमें भी सफलता को हासिल करने की प्रेरणा मिली और साल 2017 से वह दून में ई-रिक्शा चलाती हैं।

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पिता की वजह से बना रहे हैं महिला दिवस

दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ में भरतनाट्यम कर रिकॉर्ड बनाने वाली श्रद्धा बछेती ने कहा, मैं अपने पिता की वजह से आज महिला दिवस मना पा रही हूं। परिवार के सहयोग के बिना कुछ भी संभव नही है। उन्होंने बताया, एक दुर्घटना से उनके पैर का ऑपरेशन हुआ था। जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्होंने छह माह पहले से ही इस रिकॉर्ड के लिए अभ्यास शुरू कर दिया था। अब श्रद्धा निशुल्क जरूरतमंद बच्चों को भरतनाट्यम की बारीकियां सीखाती हैं।

किसी को न दें अपनी खुशी की जिम्मेदारी

दून पुस्तकालय में बालक पुस्तकालय की प्रभारी मेघा ऐनी विल्सन ने कहा, अपनी खुशी की जिम्मेदारी किसी दूसरे को न दें। हालांकि यह समझ एक दम नहीं आती लेकिन जब आती है तो हमेशा के लिए रह जाती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, हमारे आसपास के लोग ही हमारे लिए दिक्कतें पैदा करते हैं। इसलिए जरूरी है अपने आसपास के लोगों को भी पहचानना होगा।

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इन्होंने भी रहे विचार

पर्यावरण संरक्षण के लिए लंबे समय से काम कर रहीं सुमति नौटियाल समेत नेहा गुप्ता, पल्लवी पटेल, सुलोचना, शाहिना सैफी, बीना क्षेत्री और विनिता, सीमा कौशिक, अर्चना यादव कपूर ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने बताया, कैसे चुनौतियों को पार पाकर उन्होंने अपने क्षेत्र में सफलता हासिल की।

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