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नकली हॉलमार्क ज्वैलरी खरीदने से बचने की 10 आसान ट्रिक

Thu, 05 Nov 2015 08:14 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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फेस्टिवल सीजन में अगर ज्वैलरी खरीदने जा रहे हैं तो होशियार हो जाइए। कहीं ऐसा न हो कि असली के चक्कर में नकली हॉलमार्क वाली ज्वैलरी लेकर आ जाएं।
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नकली हॉलमार्क ज्वैलरी खरीदने से बचने की 10 आसान ट्रिक

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ऐसे में ग्राहक थोड़ी सावधानी से दुकानदार की चालाकी को पकड़ सकते हैं और खरीदारी में ठगी से बच सकते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से सोने या चांदी की ज्वैलरी की शुद्धता को बीआईएस हॉलमार्क दिया जाता है।
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इसके लिए मानक ब्यूरो ज्वैलरी को अपनी लैब में टेस्ट करने के बाद ज्वैलर को लाइसेंस जारी करता है। लेकिन शहर में 660 ज्वैलर्स की दुकानों में से केवल 72 के पास ही हॉलमार्क का लाइसेंस है।

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इतनी कम संख्या में हॉलमार्क का लाइसेंस होना, यह दर्शाता है कि अधिकतर ज्वैलर्स ग्राहकों को भ्रमित करके गहने बेच रहे हैं। दुकानदारों के पास या तो हॉलमार्क वाले गहने होते नहीं है या फिर नकली हॉलमार्क का प्रयोग करते हैं।
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देहरादून में करीब 660 ज्वैलर्स की दुकानें हैं, लेकिन हॉलमार्क का लाइसेंस केवल 72 के पास ही है। ऐसे में अधिकतर दुकानदार असली के नाम पर नकली हॉलमार्क वाले गहने बेच रहे हैं और झूठे प्रचार के दम पर शुद्धता का दावा कर रहे हैं।
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नकली ज्वैलरी खरीदने से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें। हॉलमार्क वाली शुद्ध ज्वैलरी पर पांच मुहर होती है। पहली मुहर बीआईएस का चिह्न होता है।
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दूसरी मुहर नंबर ऑफ प्योरिटी (375 यानी 9 कैरेट, 585 यानी 14 कैरेट, 708 यानी 17 कैरेट, 875 यानी 21 कैरेट, 916 यानी 22 कैरेट, 958 यानी 23 कैरेट) की होती है।

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तीसरी मुहर दुकान का लोगो होता है। चौथी मुहर बीआईएस सेंटर के नंबर की होती है और पांचवीं मुहर मैन्यूफैक्चरिंग ईयर (वर्ष 2000 के लिए-ए, 2001 के लिए-बी, 2002 के लिए-सी, 2003 के लिए-डी, 2004 के लिए-ई, 2005 के लिए-एफ, 2006 के लिए-जी, 2007 के लिए-एच, 2008 के लिए-जे) की होती है।

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सभी मुहर को ग्राहक को दिखाने के लिए दुकान में ज्वैलर को मैग्नीफाइंग ग्लास रखना अनिवार्य होता है। यह ग्राहक का अधिकार है कि वह जो ज्वैलरी खरीद रहा है, उस पर खुद पांचों मुहर देख ले।
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इसके अलावा दुकान के लाइसेंस नंबर के आधार पर मोबाइल से भारतीय मानक ब्यूरो की वेबसाइट (www.bis.org.in) पर जांच कर सकते हैं। (स्टोरीः आफताब अजमत)
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