फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का जरिया भी बन सकती हैं। अभिनेत्री, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता आरुषि निशंक ने यह बात मुंबई में आयोजित 'वेव समिट के मंच से कही, जिसका उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
पैनलिस्ट के रूप में बोलते हुए आरुषि निशंक ने कहा कि सिनेमा की शक्ति उसके कंटेंट और कहानी कहने की शैली में है, जो ‘भारत’ और ‘इंडिया’ के बीच सेतु का कार्य कर सकती है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक कूटनीति और राष्ट्रीय एकता का प्रभावी माध्यम बताया।
अरुषि ने कहा कि हमारी जड़ों से जुड़ी कहानियां न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि शिक्षित करती हैं और हमें एकजुट भी करती हैं। सिनेमा सीमाओं, वर्गों और संस्कृतियों से परे संवाद करता है। प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का उल्लेख करते हुए आरुषि ने कहा, भारत के युवा आज राष्ट्र की रचनात्मक अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक बन चुके हैं। देश की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर शहरी और ग्रामीण युवाओं की कहानियों में छिपी है।