हिमवीर रोज सुबह 10 बजे के बाद जमीन के नीचे से पाइप निकालकर उसे धूप में रख रहे हैं। इससे जमा हुआ पानी पिघल कर टैंक तक पहुंच रहा है। हालांकि जवानों को दो-तीन घंटे तक ही पानी मिल पा रहा है।
आईटीबीपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले वर्षों तक 15 दिसंबर के बाद ही पाइपों में पानी जमता था, लेकिन इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्र में अधिक ठंड के चलते ऐसी स्थिति अक्तूबर अंत तक ही आ गई है। बल की अग्रिम चौकियों में राशन आदि की कोई किल्लत नहीं है। शीतकालीन राशन पहले ही हेलीकॉप्टरों के जरिये अग्रिम चौकियों तक पहुंचा दिया गया है।
बता दें कि पिछले साल भी ठंड की शुरुआत में ही पारा - 15 डिग्री तक पहुंच गया था। जिसके बाद भयानक ठंड के कारण पानी की लाइनें जम गई थी। इससे जवानों को बर्फ पिघलाकर पानी पीना पड़ रहा है। यही स्थिति इस बार भी बनी हुई है।