उत्तराखंड में कई ऐसे स्थान हैं जहां पर कुछ न कुछ रहस्य छिपे हैं। यहां ऐसी ही एक गुफा है जिसमें प्रकृति के बीच एक ऐसा रहस्य छिपा है जिससे वैज्ञानिक भी हैरान है।
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हम बात कर रहे हैं देहरादून के सहस्त्रधारा में बनी गुफाओं की। लेकिन यहाँ का मुख्य आकर्षण वे बलदी नदी और मनोहारी दृश्यों वाली गुफ़ाएँ जिनमें लगातार पानी टपकता रहता है।
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पहाड़ी के अन्दर प्राकृतिक रूप से तराशी हुई कई छोटी छोटी ग़ुफाओं से औषधीय गुणों वाला झरना भी बहता हैं। कहा जाता है कि इन गुफाओं से आने वाले पानी में नहाने से त्वचा के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
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दरअसल यह पानी गंधक युक्त होता है, जिसके उपयोग से चमड़ी के दर्द ठीक हो सकते हैं। पहाड़ी से गिरते हुए जल को प्राकृतिक तरीक़े से ही संचित किया गया है। थोड़ी दूर पहाड़ी पर आगे चलने पर गंधक कुंड है।
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कुछ लोग इस कुंड के पानी में नहाते हैं तो कुछ लोग झरनों में। गर्मियों में तपिश से बचने के लिए हर साल सैंकडों की संख्या में लोग यहाँ आते हैं। यह स्थान प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के प्रिय स्थानों में भी रहा है।
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यहांह तक कि कई लोग अपने पोलियो ग्रस्त बच्चों को गंधक के पानी में नहलाते हुए नजर आते है। सहस्त्रधारा देहरादून के मुख्य पर्यटन स्थलों में से है। वर्तमान में यहाँ सबसे आकर्षण का केन्द्र यहाँ का रोप वे है। जिसे मणिदीप के नाम से जाना जाता है।
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मुख्य सहस्त्रधारा से लगभग तीन हज़ार मीटर की ऊँचाई पर स्थित मणिदीप को जाने के लिए रोप वे का निर्माण किया गया है। इस मणिदीप पर बड़ों व बच्चों के लिए मनोरंजन के कई साधन मौजूद हैं। हैं।
यहाँ तक पहुँचने की रोमांचक हवाई यात्रा अपने आप में यहाँ आने वाले पर्यटकों को अविस्मरणीय बना देती है। यहाँ पहुँचने पर ऐसा लगता है कि हम पहाड़ों की रानी के आसपास पहुँच गये हैं।