वडाली बंधुओं के गीतों पर शुक्रवार को दूनवासी झूम उठे। उनके एक से बढ़कर एक गीतों का दर्शकों ने देर रात तक जमकर लुत्फ लिया। इससे पहले उत्तर प्रदेश और गुजरात के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया।
विज्ञापन
2 of 6
वडाली बंधुओं ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरनचंद वडाली और प्यारेलाल वडाली ने बेहतरीन गायकी का नमूना पेश कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
विज्ञापन
3 of 6
उन्होंने अमीर खुसरो के प्रसिल कलाम ‘आज रंग है’ के साथ अपने कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद देर रात तक दर्शकों की फरमाइश पर उन्होंने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। उन्होंने ‘मर मैया तेरे वेखन नू चुख छलखा’, ‘नित खैर मांगा सोणीया मैं तेरी, दुआ ना कोई होर मंगया’, ‘मैं तो पिया संग नैना लगा आई रे’,
4 of 6
‘छाप तिलक सब छीनी रे, तोसे नैना लगाके’ जैसे एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। जैसे ही उन्होंने अपना सुप्रसिद्ध गीत ‘तू माने या ना माने दिलदारा, असा दे तेनु रब मानिया’ शुरू किया पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दर्शक देर रात तक उनके गीतों पर झूमते रहे।
विज्ञापन
5 of 6
विरासत में सुबह नेशनल पेंटर कैंप में चित्रकारों ने कला के विविध आयामों पर चर्चा की। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त चंपारण के राजेश श्रीवास्तव ने चित्रकारी में आध्यात्म पर विचार रखे। करनाल की अनु एब्सट्रेक्ट ने प्रकृति के चित्रण को लेकर जानकारी दी।
शाम को इलाहाबाद के कलाकारों ने देड़िया नृत्य के साथ सांस्कृतिक संध्या का आगाज किया। कलाकारों ने विशेष रूप से निर्मित मटके के साथ आकर्षक भाव-भंगिमाओं में नृत्य की प्रस्तुति दी।