इस बार विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। यहां 18 साल से लेकर 103 साल तक के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने मतदान केंद्र तक पहुंचे।
विधानसभा सीट के लिए बृहस्पतिवार को संपन्न हुए चुनाव में 58.6 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने वोट डाले। विधानसभा क्षेत्र के चार बूथों पर शाम पांच बजे बाद भी लाइनें लगी। चुनाव संपन्न होने के बाद यहां नौ प्रत्याशियों का भाग्य अब ईवीएम में कैद हो गया है।
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बता दें कि पूर्व में कर्णप्रयाग सीट से बसपा प्रत्याशी कुलदीप कनवासी की सड़क हादसे में मौत हो जाने से इस सीट पर पूर्व निर्धारित तिथि 15 फरवरी को चुनाव स्थगित कर दिया गया था। आयोग ने नौ मार्च को उपचुनाव कराने का निर्णय लिया था।
इसी क्रम में बृहस्पतिवार को सभी 169 बूथों पर शांतिपूर्वक मतदान संपन्न हुआ। जीआईसी गौचर, प्राइमरी स्कूल मालई, पज्याणा और लंगासू में पांच बजे बाद भी मतदाताओं की लाइनें लगी रही। विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी केएन गोस्वामी ने बताया कि सभी बूथों पर शांतिपूर्वक मतदान संपन्न हुआ है।
एक प्रतिशत कम हुआ मतदान
बृहस्पतिवार को संपन्न हुए मतदान में 2012 की अपेक्षा करीब एक प्रतिशत कम लोगों ने वोट डाले। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में विधानसभा में करीब 59.88 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि बृहस्पतिवार को संपन्न हुए चुनाव में 58.6 प्रतिशत मतदान हुआ। यह स्थिति तब है जबकि 2012 की अपेक्षा विधानसभा क्षेत्र में सात हजार मतदाता बढ़े हैं।
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विधानसभा क्षेत्र कर्णप्रयाग में बृहस्पतिवार को हुए मतदान में बुजुर्गों ने भी भागीदारी निभाई। गांवों से मतदान केंद्रों की दूरी अधिक होने के बाद भी बुजुर्ग पगडंडियां पार कर लोकतंत्र के महापर्व में शामिल हुए।
बुजुर्गों का कहना था कि पांच सालों के विकास, अधिकार और कानूनों के हितों के लिए मतदान जरूरी है। धल गांव के 76 वर्षीय गोविंद सिंह और 74 वर्षीय रेवती देवी ने दो किमी की पैदल दूरी नापकर मतदान केंद्र आए।
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सिलपाटा की 78 वर्षीय गुस्याड़ी देवी ने मतदान के लिए 800 मीटर लंबी पगडंडी नापी।
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64 वर्षीय दिव्यांग पुष्कर सिंह भी मतदान के लिए दो किमी पैदल चले।
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आदिबदरी के ढमकर गांव की 103 वर्षीय प्यूंली देवी को ले जाते उनके बेटे।
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गौचर के 96 वर्षीय केशर सिंह भंडारी।
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सिमली के 90 वर्षीय विजय राम डिमरी।
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विधानसभा चुनाव में कई युवाओं ने पहली बार मतदान किया। कई युवा मतदाता देहरादून और अन्य स्थानों से मतदान के लिए बूथ पर पहुंचे। मुख्य बाजार निवासी अंशुल अग्रवाल देहरादून में इंजीनियरिंग के छात्र हैं।
बुधवार को अंशुल अपने घर पहुंचे और बृहस्पतिवार को नगर पालिका के बूथ पर मतदान किया। अंशुल ने कहा कि लोकतंत्र में भागीदारी से देश के विकास की दिशा तय होती है।
वहीं पहली बार वोट करने पहुंचे संचिता और हिमांशु अरोड़ा भी पहली बार वोट देने को लेकर उत्साहित दिखे। ग्रामीण क्षेत्र के बूथ स्वर्का में पंकज, राहुल, रजनी, जितेंद्र, पवन और हरीश ने भी पहली बार वोट डाला। गौचर, आदिबदरी और गैरसैंण में पहली बार वोट डाल रहे युवा मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला।
गौचर में मतदाता सूची में नाम न होने से कई मतदाता बिना वोट डाले बूथ से लौट गए। मतदाताओं कहना है कि पिछले चुनावों में मतदान किया था, लेकिन इस बार मतदाता सूची में नाम नहीं मिला और मतदान नहीं कर पाए। वहीं कई एक ही परिवार के मतदाताओं के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर होने से भी मतदाताओं को परेशानी हुई।
नगर पालिका के वार्ड संख्या पांच के सियानंद ने बताया कि सुबह जब बूथ पर पहुंचे तो मतदाता सूची में नाम नहीं मिला। सियानंद के पिता टिड्डाराम, माता संतोष देवी सहित परिवार के अन्य दो सदस्य जूली और देशराज का नाम भी इस बार मतदाता सूची में नहीं था।