उत्तराखंड के श्रीगर स्थित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की झील में पानी बढ़ने से धारी गांव पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है। तस्वीरों में देखिए हाल
विज्ञापन
PICS: हाइड्रो प्रोजेक्ट से 'मौत' की कगार पर एक गांव
2 of 6
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना से जल्द ही विद्युत उत्पादन शुरू होने वाला है। टरबाइन घुमाने के लिए परियोजना निर्मात्री कंपनी एएचपीसीएल (अलकनंदा हाईड्रो पावर कंपनी लि.) की ओर से अलकनंदा नदी का पानी रोककर झील का निर्माण किया गया है।
विज्ञापन
PICS: हाइड्रो प्रोजेक्ट से 'मौत' की कगार पर एक गांव
3 of 6
एएचपीसीएल की ओर से अलकनंदा नदी में 330 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इन दिनों परियोजना की टरबाइनों का परीक्षण चल रहा है। इसके लिए कोटेश्वर (स्वीत) के निकट पानी रोककर पावर चैनल (नहर) में डाला गया है। पानी रुकने से पपड़ासू तक झील बन गई है।
PICS: हाइड्रो प्रोजेक्ट से 'मौत' की कगार पर एक गांव
4 of 6
झील ने डुंगरीपंथ के लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। यहां राम मंदिर लगभग डूबने की स्थिति में है। नए मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। झील का पानी चमधार गाड़ की ओर आ रहा है। इससे डुंगरीपंथ के लोग सीधे अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। (तस्वीर में लाल घेरे में श्रीराम मंदिर।)
विज्ञापन
PICS: हाइड्रो प्रोजेक्ट से 'मौत' की कगार पर एक गांव
5 of 6
कंपनी ने पानी तो रोक दिया, लेकिन इससे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किए। धारी गांव जाने वाले मोटर मार्ग सहित बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोहबगड़, डुंगरीपंथ, गंडासू और फरासू के निकट झील के पानी से कटाव होना तय है।
PICS: हाइड्रो प्रोजेक्ट से 'मौत' की कगार पर एक गांव
6 of 6
झील के दोनों ओर सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है। झील के किनारे खुले हुए हैं। नियमानुसार कंपनी की ओर से बैरीकेट लगाए जाने चाहिए थे। एचसीएल के जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि झील के लेवल तक पौधरोपण किया जाना है। जबकि इससे ऊपर बैरीकेट लगाए जाने हैं। इस पर कार्य चल रहा है।