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राम मंदिर पर विहिप और स्वामी स्वरूपानंद में छिड़ा 'महासंग्राम', भरी सभा में एक-दूसरे पर किए तीखे वार

Fri, 21 Jun 2019 05:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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विहिप और संतों की बैठक - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद से जुड़े साधु संत और ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आमने सामने आ डटे हैं। दोनों ने एक दूसरे पर राम मंदिर के निर्माण में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया है।
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विहिप और संतों की बैठक - फोटो : अमर उजाला
विश्व हिंदू परिषद की हरिद्वार में संपन्न हुई दो दिवसीय केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती भी निशाने पर रहे। मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य महामंडलेश्वर स्वामी श्याम देवाचार्य ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती पर राम मंदिर के निर्माण में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया। कहा कि जब आंदोलन प्रारंभ हुआ था, तब स्वामी स्वरूपानंद कहीं नहीं थे।
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विहिप और संतों की बैठक - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने उन पर इस आंदोलन के जनांदोलन बनने पर कांग्रेस के इशारे पर काम करने का आरोप जड़ा। वहीं, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस दोनों पर राम विरोधी होने का आरोप जड़ा।

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विहिप और संतों की बैठक - फोटो : अमर उजाला
कहा कि यह दोनों संगठन नहीं चाहते कि राम मंदिर बने। शंकराचार्य ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद पहले यह स्पष्ट करे कि वह भगवान राम को मनुष्य मानती है या भगवान। इसके बाद ही वह राम मंदिर पर बात करें। अगर वह भगवान राम को मनुष्य मानती है तो उसे राम मंदिर के निर्माण के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है ।
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विहिप और संतों की बैठक - फोटो : अमर उजाला
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि विश्व हिंदू परिषद का संचालन आरएसएस करती है। और आरएसएस भगवान राम को महापुरुष मानती है भगवान नहीं। उन्होंने संघ के प्रमुख रहे सदाशिव गोलवलकर की पुस्तक का हवाला दिया।
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स्वामी परमानंद - फोटो : अमर उजाला
कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तक में राम के बारे में बताया है कि आरएसएस वाले राम को महापुरुष मानते हैं। महापुरुष का स्मारक बनता है, मंदिर नहीं और हम सनातनी लोग भगवान राम को भगवान मानते हैं, इसलिए भगवान राम के मंदिर बनाने का अधिकार हमें है। विश्व हिंदू परिषद या आरएसएस को नहीं।
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