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शुक्र और गुरु दोनों होंगे अस्त, ब्रह्मांड में होने वाली अनोखी घटना से सभी राशियों पर पड़ेगा असर

Sun, 30 Sep 2018 09:03 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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astrology - फोटो : astrology
अगले कुछ ही दिनों में अनोखी अकाशीय घटना होने वाली है। एक-एक कर शुक्र और गुरु दोनों अस्त हो जाएंगे। देव और दानवों के दो गुरुओं के अस्त हो जाने का प्रभाव धरती पर पड़ेगा। सुखद यह है कि कुछ ही समय बाद विष्णु आदि देवताओं का जागरण हो जाएगा। जैसे ही विष्णु इस चराचर का कारोबार शिव से संभालेंगे, वैसे ही शुक्र और गुरु का अस्त होना बेमानी हो जाएगा। 
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venus - फोटो : venus
अश्विन शुक्ल पक्ष में 16 अक्तूबर को शुक्र अस्त हो रहे हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष में 10 नवंबर को गुरु भी पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएंगे। इन दोनों का अस्त होना आकाशीय विरलता को जन्म देता है। ऐसा होने पर अनेक प्रतिगामी शक्तियां ज्योतिष की दृष्टि से उदित हो जाती है। सुखद यह है कि 19 नवंबर को चार महीने से पाताल गए भगवान विष्णु का जागरण हो रहा है। 
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astrology - फोटो : astrology
इस दिन देवोत्थान एकादशी है और तुलसी विवाह का मांगलिक पर्व है। संतों का चातुर्मास भी इसी दिन समाप्त होगा। एकादशी आते ही विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर चार महीनों से लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा। सात दिसंबर को गुरु पूर्व में अस्त हो जाएंगे, लेकिन शुक्र जागरण इस वर्ष नहीं होगा। पंडित संतराम के अनुसार, इस घटना का सभी राशियों पर कुछ अच्छा असर नहीं रहेगा। 

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astrology - फोटो : astrology
विष्णु जागरण के चलते शुक्र के अस्त होने का प्रभाव नहीं पड़ेगा। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं और राक्षसों के गुरु शुक्राचार्य। आकाश में इन दोनों की उपस्थिति ग्रहीय समन्वय की स्थिति उत्पन्न करती है। दोनों गुरुओं के रहते आकाश की बाधाएं स्वत: मिटती रहती हैं। यदि देव जागरण न होता तो यह स्थिति धरती पर भारी पड़ती।  
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astrology - फोटो : astrology
ज्योतिषाचार्य पंडित हरिदेव जोशी के अनुसार ग्रहों का मनुष्य के जीवन पर भारी प्रभाव पड़ता है। कुछ प्रभाव राशियों के अनुसार आते हैं तो कुछ प्रभाव समग्रता को प्रभावित करते हैं। उन्होंने बताया कि विष्णु के जागरण के बाद सभी प्रकार की बाधाएं स्वत: मिट जाती है। राजा बलि को दिया वचन निभाने आषाढ़ शुक्ल पक्ष में भगवान विष्णु पाताल गए थे और धरती पर शिव का साम्राज्य हो गया था। अब फिर संपूर्ण सत्ता विष्णु के हाथ में आ जाएगी। मांगलिक कार्यों पर चार महीनों से लगा विराम अब समाप्त होने वाला है। 
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