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Uttarkashi: सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा की भूमि से सुरक्षित बाहर आए मजदूर, उत्तराखंड ने रचा इतिहास

Tue, 28 Nov 2023 11:52 PM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, उत्तरकाशी
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ब्रह्मखाल में भगवान ब्रह्मा का मंदिर - फोटो : amar ujala

सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की भूमि ब्रह्मखाल (सिलक्यारा) क्षेत्र की सुरंग से आखिर मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने पर उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान ब्रह्मा ने तपस्या की थी। राजस्थान के पुष्कर की भांति यहां भी ब्रह्मखाल में भगवान ब्रह्मा का मंदिर है, जिसमें उनकी पूजा-अर्चना होती है।

पूरे ऑपरेशन सिलक्यारा के दौरान तकनीकी के इस्तेमाल के साथ आस्था का बेजोड़ संगम देखने को मिला। हर दिन अभियान की शुरुआत से पहले सुरंग के बाहर बाबा बोखनाग की पूजा होती थी। भंडारस्यूं पट्टी के सिलक्यारा से कुछ मील पहले कस्बा ब्रह्मखाल है।

इस स्थान का अपना अलग महत्व बताया जाता है। स्थानीय निवासी विरेंद्र अवस्थी ने बताया कि यह मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इस स्थान पर तपस्या की थी और ब्राह्मण रूप धारण किया था। राजस्थान के पुष्कर की भांति यहां उनका बहुत प्राचीन मंदिर है।

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उत्तरकाशी टनल हादसा - फोटो : amar ujala

राजस्थान से आए हुए रावत इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। वह कहते हैं, दिवाली के दिन भले ही मुश्किलों भरी खबर आई हो लेकिन अन्य देवताओं की तुलना में काफी उदार कहे जाने वाले भगवान ब्रह्मा की इस भूमि ने आखिर मजदूरों की जिंदगी के लिए राह आसान कर दी।

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सुरंग में रेस्क्यू ऑपरेशन - फोटो : amar ujala

ऑस्ट्रेलिया से आए इंटरनेशनल टनल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. अर्नोल्ड डिक्स की भी सुरंग में प्रवेश से पहले पूजा करते हुए तस्वीर काफी वायरल हुई।

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इंदौर से एयरलिफ्ट कर मंगवाई गयी मशीन के पार्ट्स जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। - फोटो : amar ujala
दिवाली के दिन सुबह सुरंग में मलबा आने पर 41 मजदूरों के भीतर फंसने की बुरी खबर आई थी।

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सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन - फोटो : amar ujala
सुबह से अपनों के इंतजार में बैठे परिजनों को रात को खुशखबरी मिल गई।
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