सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की भूमि ब्रह्मखाल (सिलक्यारा) क्षेत्र की सुरंग से आखिर मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने पर उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान ब्रह्मा ने तपस्या की थी। राजस्थान के पुष्कर की भांति यहां भी ब्रह्मखाल में भगवान ब्रह्मा का मंदिर है, जिसमें उनकी पूजा-अर्चना होती है।
पूरे ऑपरेशन सिलक्यारा के दौरान तकनीकी के इस्तेमाल के साथ आस्था का बेजोड़ संगम देखने को मिला। हर दिन अभियान की शुरुआत से पहले सुरंग के बाहर बाबा बोखनाग की पूजा होती थी। भंडारस्यूं पट्टी के सिलक्यारा से कुछ मील पहले कस्बा ब्रह्मखाल है।
इस स्थान का अपना अलग महत्व बताया जाता है। स्थानीय निवासी विरेंद्र अवस्थी ने बताया कि यह मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इस स्थान पर तपस्या की थी और ब्राह्मण रूप धारण किया था। राजस्थान के पुष्कर की भांति यहां उनका बहुत प्राचीन मंदिर है।