लद्दाख में शहीद देव बहादुर (24) की बहन के हाथ पीले करने की इच्छा भी अधूरी रह गई। वह इकलौती बहन गीता की शादी धूमधाम से करना चाहते थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। देव बहादुर का बचपन काफी मुफलिसी में बीता है। पिता शेर बहादुर बचपन से मजदूरी करके जीवनयापन करते थे और सीमित आय में उन्होंने बच्चों को पढ़ाया।