पर्वतारोहण की उनकी कुशल क्षमता को देखते हुए 2013 में सेना ने उन्हें दार्जिलिंग स्थित हिमालयन माउंटेनियरिंग संस्थान में बतौर प्रशिक्षक नियुक्त किया। 2014 में यमुना प्रसाद प्रशिक्षण देने के लिए भूटान भी गए। अपनी काबिलियत के दम पर भूटान से आने के बाद उन्होंने जेसीओ का कमीशन निकाला और हवलदार से सूबेदार बने। पर्वतारोहण प्रेम और पहाड़ में पर्वतारोहण प्रशिक्षण की संभावना को देखते हुए यमुना प्रसाद सेना से रिटायर्ड होने के बाद युवाओं को प्रशिक्षण देकर पर्वतारोहण में विश्व स्तर पर उत्तराखंड को एक अलग पहचान देना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही यमुना प्रसाद ने पर्वतों की गोद में ही अंतिम सांस लेकर देश को गौरवान्वित कर दिया।