भारत मां की आन और शान के लिए शहीद हुए उत्तराखंड के लाल राकेश डोभाल का पार्थिव शव जब घर पहुंचा तो दस साल की बेटी ने कुछ ऐसी बात कह दी कि सब उसके जज्बे को सलाम करने लगे।
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- फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के बारामुला में पाक गोलाबारी में शहीद हुए बीएसएफ के शहीद सब इंस्पेक्टर राकेश डोभाल को सोमवार को नम आंखों से विदाई दी गई। इस दौरान भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
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बीएसएफ के जवानों ने पूर्णानंद घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया, उसके बाद पूर्णानंद घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे भाई मयंक डोभाल ने मुखाग्नि दी।
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मूल रूप से पौड़ी जिले के पौड़ी ब्लॉक के इडवालस्यूं पट्टी के कंडारी गांव निवासी राकेश डोभाल (37) का पार्थिव शरीर सुबह सवा आठ बजे उनके गंगानगर स्थित गणेश विहार चार नंबर गली पहुंचा।
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जैसे ही शहीद राकेश डोभाल का शव घर पहुंचा तो उनकी दस वर्षीय पुत्री दित्या ने बीएसएफ के जवानों से कहा कि तुम मेरे पापा के साथ बॉर्डर पर सेवा करते हो। दित्या ने कहा कि वह बड़ी होकर फौज जाकर देश की सेवा करेगी, अपने पापा की शहादत का बदला लेगी।
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घर में जवान का पार्थिव शरीर पहुंचते ही कोहराम मच गया। घर में उनकी पत्नी व मां का रो-रोकर बुरा हाल था हर कोई परिजनों को ढांढस बंधा रहा था।
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martyr
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दोपहर साढ़े 12 बजे अंतिम यात्रा पूर्णानंद घाट पर पहुंची। यहां पर बीएसएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान घाट पर भी जब तक सूरज चांद रहेगा तब तक राकेश तेरा नाम रहेगा। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय पूर्णानंद घाट पर शहीद राकेश डोभाल को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शिक्षामंत्री ने शहीद को पुष्पचक्र भेंट किया। शिक्षा मंत्री ने पाकिस्तान की नापाक हरकत को गलत बताया।