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शक्तिमान प्रकरण: अमेरिका से कृत्रिम पैर मंगवाने के बाद भी नहीं बची थी जान, जानें पूरा मामला जिसमें फंस गए थे भाजपा नेता

Thu, 23 Sep 2021 10:47 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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शक्तिमान प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
देहरादून में शक्तिमान (पुलिस का घोड़ा) की मौत के मामले में आरोपी कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी समेत पांचों आरोपियों को सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इस मामले में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन के पास पर्याप्त ठोस सुबूत नहीं थे। अदालत के फैसले के बाद मंत्री गणेश जोशी ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ प्रसन्नता भी जाहिर की।

पुलिस के घोड़े शक्तिमान को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे। उसके इलाज में स्थानीय से लेकर अमेरिका तक के डॉक्टरों को बुलाया गया था। अमेरिकी डॉक्टर जेमी वॉघन ने तो शक्तिमान के लिए कृत्रिम पैर मंगाया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शक्तिमान को नहीं बचाया जा सका। 

शक्तिमान प्रकरण: गणेश जोशी समेत पांच आरोपी दोषमुक्त, पुलिस के घोड़े शक्तिमान की हुई थी मौत

14 मार्च से 20 अप्रैल 2016 पूरे 36 दिनों तक शक्तिमान ने मौत से जंग लड़ी थी। उसके इलाज के लिए बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा के घोड़ों के डॉक्टर को भी देहरादून बुलाया गया था। उन्होंने भी शक्तिमान के पैर का ऑपरेशन किया। डॉक्टरों की टीम ने शक्तिमान के पैर को काटकर अलग कर दिया था।
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शक्तिमान प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद अमेरिका की डॉक्टर जेमी वॉघन उसके इलाज के लिए आईं थीं। जेमी वॉघन ने अपनी फेसबुक पर एक पोस्ट डाली, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि कोई वर्जीनिया से भारत आ रहा हो तो वह उनके द्वारा ऑर्डर किया हुआ प्रोस्टेथिक लेग (कृत्रिम पैर) ले आए। 
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शक्तिमान प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
इस पर एक व्यक्ति अपने खर्च पर इस पैर को भारत लेकर आया। शक्तिमान को यह पैर लगाया गया, लेकिन वह उस पर खड़ा नहीं हो सका। कई दिनों तक इस पैर को लगाने के बाद भी डॉक्टर उसे राहत नहीं पहुंचा सके। अंत में 20 अप्रैल को शक्तिमान ने पुलिस लाइन के अस्तबल में ही दम तोड़ दिया।

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शक्तिमान प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
मामला वर्ष 2016 का है। 14 मार्च को विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा का प्रदर्शन था। तत्कालीन विधायक गणेश जोशी अन्य नेताओं के साथ रिस्पना पुल पर मौजूद थे। यहां उन्हें भारी पुलिस फोर्स ने बैरिकेडिंग कर रोक लिया। इस दौरान घुड़सवार पुलिस भी मौजूद थी। प्रदर्शन के बीच शक्तिमान नाम के पुलिस के घोड़े का पैर टूट गया। प्रदर्शन वहीं समाप्त हो गया और शक्तिमान का पुलिस लाइन में इलाज शुरू किया गया।
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शक्तिमान प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पुलिस ने नेहरू कॉलोनी थाने में तत्कालीन विधायक गणेश जोशी, प्रमोद बोरा, जोगेंद्र सिंह पुंडीर, अभिषेक गौड़ और राहुल रावत के खिलाफ एक राय होकर बलवा, पुलिस से मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और घोड़े को घायल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने 18 मार्च 2016 को गणेश जोशी को एक होटल से गिरफ्तार कर लिया था। इस बीच शक्तिमान का इलाज चल रहा था। गणेश जोशी को 22 मार्च को जमानत मिल गई। 
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शक्तिमान प्रकरण में बरी होने के बाद मिठाई खिलाते मंत्री गणेश जोशी - फोटो : अमर उजाला
मामले में पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बीच में दो बार मुकदमा वापसी की अर्जी भी सरकार की ओर से कोर्ट में लगाई गई, लेकिन न्यायालय ने इससे इनकार कर लिया। मुकदमे का करीब चार साल ट्रायल चला। बृहस्पतिवार को सीजेएम लक्ष्मण सिंह की अदालत ने माना कि अभियोजन पूरे मामले में आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई ठोस सुबूत प्रस्तुत नहीं कर सकी। ऐसे में अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए पांचों आरोपियों को ससम्मान बरी कर दिया।
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