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उत्तराखंडः आखिरी समय तक नए सीएम के नाम पर सस्पेंस, जाते-जाते फिर चौंका गए त्रिवेंद्र सिंह रावत 

Thu, 11 Mar 2021 11:15 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal भूपेंद्र राणा, अमर उजाला, देहरादून
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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : पीटीआई फाइल फोटो
कार्यवाहक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जाते-जाते एक बार फिर सबको चौंका गए। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर आखिरी समय तक सस्पेंस बना रहा। विधानमंडल दल की बैठक शुरू होने तक मुख्यमंत्री के लिए तीरथ सिंह रावत के नाम की कहीं कोई चर्चा नहीं थी। बैठक में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पार्टी की ओर से विधानमंडल दल के नेता को लेकर लिए गए निर्णय का प्रस्ताव रखा। पौड़ी लोकसभा सीट से सांसद तीरथ सिंह रावत के नाम का एलान होते ही सब चौंक गए। बैठक शुरू होने तक भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में तीरथ सिंह रावत के नाम की कोई चर्चा नहीं थी। कार्यालय में अंदर बैठक चल रही थी और बाहर कार्यकर्ताओं में केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम तय होने की चर्चाएं थी। बैठक में 11.15 बजे कार्यवाहक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पार्टी ने विधानमंडल दल का नेता चुनने का निर्णय लिया है। पार्टी ने उन्हें नए नेता का प्रस्ताव रखने की जिम्मेदारी दी। पार्टी में मंत्री से विधायक व अन्य पदाधिकारी सब कार्यकर्ता हैं। पार्टी ने ऐसे कार्यकर्ता का नाम तय किया, उस पर मुझे खुशी है। बचपन में साथ पढ़ते थे, स्वयं सेवी बनाने का मौका मिला और मेरे साथ प्रचारक व संगठन मंत्री भी रहे। सब सोच रहे थे कौन हो सकता है। इस पर वहां मौजूद लोगों के मन में धन सिंह रावत का नाम कौंध रहा था। लेकिन इसके इतर तीरथ सिंह रावत के नाम का एलान हुआ है। इससे सब चौंक गए। 
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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
चार दिनों से सियासी गलियारों में नए मुख्यमंत्री को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, धन सिंह रावत, सतपाल महाराज, अजय भट्ट के नाम की चर्चाएं जोरों पर थी। इन चर्चाओं में सांसद तीरथ सिंह रावत का नाम कहीं नहीं था। पार्टी हाईकमान ने ऐन वक्त पर तीरथ सिंह रावत का नाम तय कर सियासी चर्चाओं पर विराम लगा दिया।
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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
भाजपा की राजनीति के दो शक्ति ध्रुव त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत की मुख्यमंत्री बनने की कहानी में बहुत अंतर नहीं है। दोनों नेताओं ने राषट्रीय राजनीति से धमाकेदार वापसी की। त्रिवेंद्र मुख्यमंत्री बने और तीरथ सिंह रावत गढ़वाल के सांसद। संयोग देखिए कि आज वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए।

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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
दोनों नेताओं ने राज्य की राजनीति से बाहर होने के बाद धैर्यपूर्वक संगठन का दायित्व निभाया तो पार्टी से उन्हें अनूठा ईनाम मिला। 2014 में जब तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद पर दावेदारी की थी तो उन्हें त्रिवेंद्र सिंह रावत से चुनौती मिली थी। तब ये नेता धुर विरोधी ध्रुव बीसी खंडूड़ी और भगत सिंह कोश्यारी के सिपहसालारों में गिने जाते थे।
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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खंडूड़ी के वरदहस्त तीरथ प्रदेश अध्यक्ष बन गए। त्रिवेंद्र को केंद्र की राह पकड़नी पड़ी। वे राष्ट्रीय सचिव बनें। अपनी योग्यता के दम पर उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह का भरोसा जीता। 2017 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि उन्हें उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा।
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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
इन्हीं चुनाव में तीरथ सिंह रावत को कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सतपाल महाराज के लिए चौबट्टाखाल सीट छोड़नी पड़ी। इस सीट से तीरथ विधायक थे। उन्हें केंद्र में पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। हिमाचल भाजपा के प्रभारी भी रहे। 2019 लोकसभा चुनाव में वह गढ़वाल सीट से चुनाव जीते। त्रिवेंद्र की मुख्यमंत्री पद से विदाई हुई तो तीरथ को मुख्यमंत्री बना दिया गया।
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