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कड़वाहट के बीच इन दो दोस्तों की ये मिठाई भारत-नेपाल में रिश्तों में भी घोल रही मिठास

Thu, 24 Sep 2020 07:11 PM IST
अलका त्यागी दीपक कापड़ी, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में विण और दौला के दो दोस्तों की मिठाई भारत और नेपाल के रिश्तों में भी मिठास घोल रही है। दरअसल, दो दोस्तों राजेंद्र भट्ट और शेखर नगरकोटी ने पहाड़ी मड़ुवे और भट की सोनपापड़ी और बिस्कुट बनाने का काम शुरू कर स्वरोजगार की अलख जगाई। इतना ही नहीं उनकी ये मिठाई भारत ही नहीं, नेपाल में भी काफी पसंद की जा रही है। 
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- फोटो : अमर उजाला
दोनों दोस्तों ने देवभूमि फूड प्रोडक्शन और पैकेजिंग के नाम से स्थापित इस उद्योग में 10 महिलाओं और कोविड के कारण बेरोजगार हो चुके आठ युवाओं को भी रोजगार दिया है। दोनों ने 2019 में 10 लाख रुपये की लागत से विण में एक नाली भूमि में उद्योग लगाकर बिस्कुट बनाने का काम शुरू किया। उन्होंने लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मड़ुवे और भट से बिस्कुट और सोनपापड़ी, गजक बनाने का काम शुरू किया। 
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- फोटो : अमर उजाला
शुरुआत में काम रफ्तार नहीं पकड़ पाया, लेकिन अब उनका कारोबार अच्छा चल रहा है। उनके उद्योग में बने मड़ुवे और भट के बिस्कुट, सोनपापड़ी की मांग अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर, खटीमा सहित कई स्थानों और नेपाल में भी बढ़ गई है। वह मांग के अनुसार प्रत्येक जिले में अपने प्रोडक्ट पहुंचा रहे हैं। 

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- फोटो : अमर उजाला
इधर, दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, गाजियाबाद और नोएडा सहित कई स्थानों पर उन्होंने अपने उत्पादों के सैंपल भेजे हैं। डिमांड आने पर उत्पाद भेजेंगे। नेपाल में भी उनके उत्पाद की काफी मांग है, लेकिन लॉकडाउन के कारण झूलापुल बंद होने से उनके उत्पाद नेपाल नहीं जा पा रहे हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
गजक, बिस्कुट और सोनपापड़ी बनाने के लिए राजेंद्र भट्ट और शेखर नगरकोटी किसानों से 30 से 40 रुपये किलो मड़ुवा खरीद रहे हैं। वे किसानों को भट के भी अच्छे दाम दे रहे हैं। इससे किसानों की आजीविका में भी सुधार हुआ है। 
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