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कभी बेचते थे पान, नगर पालिका ने अतिक्रमण में हटा दी थी दुकान, 30 साल बाद मेयर बनकर दिया जवाब

Fri, 23 Nov 2018 08:53 AM IST
अनिल चन्दोला/अमर उजला, देहरादून
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देहरादून के नए मेयर सुनील उनियाल गामा
कभी पान बेचकर अपना गुजारा करने वाले भाजपा नेता ने मेयर बनकर सबको चौंका दिया है। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं देहरादून के नए मेयर सुनील उनियाल गागा की। जिस नगर निगम ने उनकी दुकान अतिक्रमण में हटाकर उन्हें बेरोजगार कर दिया उसी नगर निगम में वे आज मेयर के पद पर आसीन हुए हैं। वर्ष 1989 में जब नगर पालिका देहरादून के चुनाव हुए तो 27 वर्ष के सुनील उनियाल गामा ने फालतू लाइन वार्ड से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी सभासद पद पर ताल ठोकी, लेकिन अनुभवहीन और राजनीति के नए खिलाड़ी गामा को करारी हार का सामना करना पड़ा। वह चौथे स्थान पर रहे। 
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देहरादून के नए मेयर सुनील उनियाल गामा
इस हार के बाद उन्होंने बिना तैयारी चुनाव लड़ने से तौबा की। उसके बाद उन्होंने वर्षों तक भाजपा संगठन में खुद को मजबूत किया। लोगों के बीच रहकर काम किया। तीन दशक से उस हार की टीस रह-रहकर उन्हें परेशान करती रहती। उसका जिक्र वह गाहे-बगाहे अपनों के बीच भी करते रहते थे। आखिर 30 साल बाद वह मेयर पद पर जीत हासिल कर उस टीस को मिटाने में कामयाब रहे। मूलत: ढुंगसिर थापली गांव, टिहरी गढ़वाल निवासी सुनील उनियाल का परिवार कई दशक पूर्व देहरादून में आकर बस गया था। गामा का जन्म भी दून में ही हुआ। उनके पिता स्वर्गीय सत्य प्रकाश उनियाल जाने-माने ज्योतिषी और मां प्रेमा देवी गृहिणी थी। 
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देहरादून के नए मेयर सुनील उनियाल गामा
गांधी इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने वर्ष 1981 में पान की दुकान खोली। कुछ समय बाद उन्होंने नटराज पिक्चर हॉल के बाहर खाने-पीने के सामान की दुकान भी खोली। वर्ष 2000 तक उन्होंने यह दुकान भी चलाई। उसी वर्ष अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत उनकी दुकान भी हटा दी गई। इसके बाद गामा ने करीब 15 वर्ष तक कई अलग-अलग काम किए। छोटे-मोटे व्यापार के अलावा उन्होंने ठेकेदारी भी की। निजी जीवन में संघर्ष कर रहे गामा ने इस दौरान भाजपा संगठन के लिए भी समर्पित होकर काम किया।

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देहरादून के नए मेयर सुनील उनियाल गामा
संगठन में कई पदों पर रहते हुए उन्होंने पार्टी की मजबूती के लिए काम किया। इसी समर्पण का पुरस्कार देते हुए पार्टी ने उन्हें मेयर पद का प्रत्याशी बनाया, जहां उन्होंने पहले ही चुनाव में शानदार सफलता हासिल की। बुधवार सुबह जीत की औपचारिक घोषणा के बाद गामा ने अपनी पत्नी शोभा उनियाल, बेटे शाश्वत, बेटी श्रेया और अन्य परिजनों के साथ जीत की खुशी मनाई। इस जीत के लिए उन्होंने सबसे पहले भगवान का शुक्रिया अदा किया। उनकी पत्नी शोभा उनियाल विधानसभा में नौकरी करती हैं। पुत्र शाश्वत एमटेक कर रहे हैं। बेटी श्रेया भी पढ़ाई कर रही हैं। 
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dehradun nagar nigam
गामा यूं तो भाजपा संगठन में पिछले कई वर्षों से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे थे, लेकिन त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद वह दोबारा सक्रिय राजनीति में उतरने की तैयारी में जुट गए थे। करीब डेढ़ वर्षों से वह पार्टी के हर फोरम पर महत्वपूर्ण पदाधिकारी के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे थे। मुख्यमंत्री रावत से नजदीकी और संगठन में पैठ का नतीजा रहा कि निगम के तमाम मुद्दों में उनका हस्तक्षेप रहा।
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