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उत्तराखंड: कुमाऊं से पांचवें मुख्यमंत्री होंगे पुष्कर सिंह धामी, केवल एनडी तिवारी ने पूरा किया था कार्यकाल

Sun, 04 Jul 2021 02:00 AM IST
अलका त्यागी अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी
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पुष्कर सिंह धामी - फोटो : ट्विटर
उत्तराखंड के 20 वर्षों के इतिहास में प्रदेश को 10 मुख्यमंत्री मिले और रविवार को 11वें मुख्यमंत्री के रूप में कुमाऊं के पुष्कर सिंह धामी शपथ लेंगे। पुष्कर से पहले कुमाऊं ने चार और मुख्यमंत्री दिए हैं। इनमें सबसे पहले भगत सिंह कोश्यारी, दूसरे विजय बहुगुणा, एनडी तिवारी फिर हरीश रावत।

इसे विडंबना ही कहेंगे कि दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को छोड़कर कोई भी नेता मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। नए मुख्यमंत्री भी आठ या नौ महीने ही मुख्यमंत्री रह पाएंगे क्योंकि अगले साल मार्च तक विधान सभा चुनाव हो जाने हैं। 

उत्तराखंड : पुष्कर सिंह धामी बनेंगे नए सीएम, रविवार को शपथ लेंगे राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री

राज्य गठन के समय भाजपा ने मुख्यमंत्री की कमान नित्यानंद स्वामी के हाथ में सौंपी लेकिन 2002 का चुनाव आते-आते नित्यानंद स्वामी को इस्तीफा देना पड़ा और कुमाऊं के बागेश्वर से ताल्लुक रखने वाले भगत सिंह कोश्यारी विधायक दल के नेता चुने गए। कोश्यारी 30 अक्तूबर 2001 से एक मार्च 2002 तक सीएम रहे। पार्टी 2002 में उनके नेतृत्व में ही चुनाव में गई लेकिन उसे शिकस्त मिली। उन्होंने 123 दिन तक सीएम की कुर्सी संभाली। 

नए मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस हाईकमान ने यूपी के मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी को प्रदेश की कमान सौंपी। तिवारी ने राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए पूरे पांच साल निर्बाध रूप से सरकार चलाई और उनके कार्यकाल में प्रदेश में विकास की गति भी बेहतर रही।
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रमेश पोखरियाल ‘निशंक - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
2007 में प्रदेश की जनता ने भाजपा को जनादेश दिया। लेकिन भाजपा राज में मुख्यमंत्री बदलने का सिलसिला जारी रहा। भुवन चंद्र खंडूरी के बाद रमेश पोखरियाल निशंक और फिर खंडूरी को सीएम बनाया गया।
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विजय बहुगुणा - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
2012 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हाईकमान ने अप्रत्याशित रूप से यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के बेटे विजय बहुगुणा को कमान सौंपी। उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना था लिहाजा सितारगंज से भाजपा विधायक चुने गए किरन चंद्र मंडल ने उनके लिए अपनी सीट छोड़ी और कांग्रेस ज्वाइन कर ली।

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हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उपचुनाव में जीतकर बहुगुणा कुमाऊं से तीसरे मुख्यमंत्री बने। केदारनाथ आपदा के बाद प्रदेश की सियासत ने फिर करवट ली और बहुगुणा को 690 दिन बाद ही इस्तीफा देना पड़ा और कुमाऊं से चौथे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली हरीश रावत ने। उनके कार्यकाल में ठीक चुनाव से पहले प्रदेश में सियासी हलचल हुई और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत समेत कई कांग्रेसी क्षत्रपों ने भाजपा का दामन थाम लिया।
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पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था। हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हरीश रावत पुन: मुख्यमंत्री बने। 2017 में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती लेकिन चुनाव आते-आते इतिहास ने खुद को दोहराया, त्रिवेंद्र सिंह रावत और फिर तीरथ सिंह रावत को इस्तीफा देना पड़ा। ऐसे में कुमाऊं के पांचवें मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी के नाम पर मोहर लगी है।
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