दो सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में नौ यूनियनों के संयुक्त फोरम ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। उत्तराखंड सहित राजधानी दून में भी सभी सरकारी बैंकों के अधिकारी और कर्मचारियों ने हड़ताल कर आक्रोश व्यक्त किया। बैंककर्मियों ने कहा कि बैंकों के निजीकरण से बैंककर्मी और खाताधार दोनों को बड़ा नुकसान होगा। सरकार केवल अपना फायदा देखते हुए बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। सोमवार को विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी काली टॉपी लगाए एस्लेहॉल स्थित सेंट्रल बैंक के सामने एकत्र हुए। जहां से सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रैली निकाली। राजपुर रोड, घंटाघर से होते हुए रैली सेंट्रल बैंक पर संपन्न हुई। जहां पर घंटों बैंठ बैंककर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग की। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के संयोजक समदर्शी बड़थ्वाल ने कहा कि जिस तरह बैंकों का विलय बैंककर्मियों और खाताधारकों के लिए समस्या बन कर सामने आया है। उसी प्रकार बैंकों के निजीकरण से बैंककर्मियों और ग्राहकों को नुकसान होगा। प्रदर्शन करने वालों में पीआर कुकरेती, राजन पुंडीर, सीके जोशी, टीपी शर्मा, वीके जोशी, टीएस पांगती, आरपी शर्मा, करन रावत, विनय शर्मा, आरके गैराला, डीएस तोमर, नवीन नेगी, कुंदन रावत, पुष्पा, इला शर्मा, एकता गुलाटी, दीपशिखा, वीके बहुगुणा समेत कई बैंककर्मी मौजूद रहे।