सीआरपीएफ के जवान विरेंद्र की शहादत की खबर जिसे भी मिली, वह उनके घर की ओर चल पड़ा। विरेंद्र की बेसुध पत्नी रेनू और अन्य परिजनों को ढाढ़स बधाते हुए हर एक आंख नम हो गईं। सभी की जुबां पर सिर्फ यही बात थी कि आखिर कब तक हमारे बच्चों का खून इसी तरह बहता रहेगा। आखिर कब आतंकियों, उनके आकाओं को माकूल जवाब मिलेगा। थरूवाटी भाषा में महिलाएं यही कहती दिखीं कि ‘नाश जाय, पाक को नाश कैसे होवेगो।’