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संत का अनशन तोड़ने में लगी उत्तराखंड सरकार लेकिन खनन पर लगाम नहीं लगाती

Mon, 05 Dec 2016 09:15 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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Shivanand - फोटो : AmarUjala
पिछले 18 सालों से गंगा में खनन रोकने के लिए मातृसदन के आंदोलन की कमान संभाले स्वामी शिवानंद ने सीएम हरीश रावत पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी। शिवानंद ने आरोप लगाया कि सरकार खनन पर रोक न लगाकर उनके पीछे पड़ी हुई है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में शिवानंद ने कहा रविवार देर रात सीएम के इशारे पर और जिलाधिकारी के निर्देश पर रविवार देर रात आश्रम में भारी पुलिस बल घुसा।  
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स्वामी शिवानंद - फोटो : AmarUjala
कहा कि कोर्ट का आदेश न होने के बावजूद गैस कटर से आश्रम की तार-बाड़ को काटा गया और अधिकारी अंदर घुसे। उन्होंने सवाल किया कि शासन-प्रशासन गंगा में खनन को लेकर जब कानून का पालन नहीं करा पा रहा है तो किसने उन्हें तपस्या को भंग करने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, एसपी सिटी व जिला अस्पताल के एक चिकित्सक सहित थाना प्रभारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र देंगे। 
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Shivanand - फोटो : AmarUjala
गौरतलब है कि गंगा में खनन पर रोक को लेकर सन 1998 से मातृसदन का आंदोलन चल रहा है। अवैध खनन के विरोध में अनशन करते हुए 13 जून 2011 को मातृसदन के स्वामी निगमानंद की मौत हो गई थी। इसके बाद स्वामी शिवानंद ने आंदोलन की कमान अपने हाथों में ले ली। 2000 में आंदोलन के दौरान शिवानंद जेल गए। 2002 में प्रशासन पर स्वामी शिवानंद को जेल में जहर देने के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग भी उठी। स्वामी शिवानंद सीएम और प्रशासन से अपनी जान का खतरा बता चुके हैं।

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Soil illegal mining
इस दौरान हरिद्वार जनपद में अंधाधुंध खनन पर रोक लगाते हुए कुछ ही स्थानों पर खनन की अनुमति दी गई। लेकिन प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से अवैध खनन चलता रहा। इसके बाद खनन पर लगी कानूनी रोक का पालन करवाने के लिए कई बार आमरण अनशन पर बैठे। शिवानंद का अनशन तुड़वाने के लिए शासन और प्रशासनिक अमला एक्टिव हुआ लेकिन अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई नहीं कर पाया। कई बार शिवानंद के अनशन को लेकर प्रशासन और मातृसदन आमने-सामने आए। हर बार प्रशासन ने शासन और प्रशासन ने वादा करके उनका अनशन तुड़वा दिया लेकिन सरकार खनन पर रोक नहीं लगा पाई।
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प्रणब मुखर्जी को लिखा पत्र - फोटो : PTI
17 नवंबर में गंगा में लगातार हो रहे खनन से क्षुब्ध होकर स्वामी शिवानंद ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग कर डाली। स्वामी शिवानंद ने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस उत्तराखंड और राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सात दिन का समय दिया।
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Supreme Court hearing on Saturday - फोटो : Getty Images
पत्र में उन्होंने लिखा कि राज्य में संविधान का शासन है या किसी व्यक्ति की मनमानी? यदि संविधान का शासन है तो सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, एनजीटी और वैज्ञानिक दल की रिपोर्ट में रोक लगाने के बावजूद गंगा में खनन किस आधार पर कराया जा रहा है।  खनन पर रोक लगाने के लिए अनशन चल रहा है, उस पर ध्यान देने के बजाय पहले से लगी रोक हटाई जा रही है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : Self
स्वामी शिवानंद ने कहा कि राज्य में यदि संविधान का शासन नहीं है तो उन्हें भी नहीं रोका जाए। एक साधु को अपनी तपस्या का अधिकार है। उन्होंने लिखा कि यदि सात दिनों में जवाब नहीं मिलता है तो वह मान लेंगे कि इस पर सबकी मूक सह‌मति है और वह तपस्या करके अपना जीवन त्याग देंगे। वहीं उनके शिष्य आत्मबोधानंद इस दौरान अनशन पर बैठे हुए थे।

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मंसा पर उठाये सवाल - फोटो : अमर उजाला
28 नवंबर को स्वामी शिवानंद ने आत्मबोधानंद का 23 दिन पुराना अनशन यह कहते हुए खत्म करवाया कि वह निगमानंद की तरह अपने एक और‌ शिष्य की हत्या नहीं होने देंगे। अब वह अपने ही प्राणों का आहुति देंगे। कहा कि दो दिसंबर को अनशन की अवधि पूरी होने पर वह अन्न जल त्याग देंगे।

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राज्यपाल को भी लिखा पत्र - फोटो : AmarUjala
दो दिसंबर को जब चिठ्ठी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो शिवानंद ने पूरी तरह अन्न जल छोड़ अनशन पर बैठ गए जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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Shivanand - फोटो : AmarUjala
रविवार की रात प्रशासन के अधिकारी मातृसदन में स्वामी शिवानंद को अनशन से रोकने के लिए घुसे और 48 घंटे का समय मांगा। जिस पर सहमति बन गई। लेकिन सोमवार को शिवानंद ने अधिकारियों पर जबरन घुसने का आरोप लगाया।
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