चमोली में आपदा
- फोटो : अमर उजाला
फिलहाल संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि सेटेलाइट के जरिए मिले डाटा के आधार पर इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है कि आखिरकार आपदा के समय क्या हुआ। ऋषिगंगा आपदा के बाद उत्तराखंड में स्थित छोटे बड़े 1400 ग्लेशियर की निगरानी व उनके अध्ययन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि वर्तमान में वाडिया इंस्टीट्यूट के जलविज्ञानियों की ओर से राज्य में स्थित ग्लेशियरों में से सिर्फ पांच ग्लेशियर गंगोत्री, डोकरियानी, चौराबाड़ी, कासनी व पिंडारी जैसे ग्लेशियरों की ही मॉनिटरिंग की जा रही है।