चमोली में आपदा
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रैणी गांव की तलहटी से निकलने वाली ऋषिगंगा अब मलबे में तब्दील हो गई है। यहां जल विद्युत परियोजना मलबे में दफन हो गई है। वहीं यहां काम कर रहे मजदूरों के भारी संख्या में दबेे होने की आशंका है। रैणी के साथ ही आसपास के गांवों में करीब दो हजार ग्रामीण रहते हैं। सुखद रहा कि ये गांव नदी के दोनों छोर पर पहाड़ियों पर बसे हैं, जिससे ग्लेशियर टूटने के बाद मलबे और पानी के सैलाब से गांव पूरी तरह सुरक्षित रहे।