रात 11.30 बजे जब मूसलाधार बारिश के बीच तेज आवाज सुनाई दी, तो नींद टूट गई और लगा कहीं बादल फट गया। मन में अनहोनी की आशंका घर कर गई और घबराहट हो रही थी। इस दौरान बाहर कुछ लोगों की आवाज सुनी तो मैं भी कमरे से बाहर आ गया। तभी कुछ लोग दौड़ते हुए आए और बोले कि डाट पुल के पास पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ है, कुछ दुकानें भी ध्वस्त हो गईं हैं।
गौरीकुंड हादसा: दुकानों पर काल बनकर गिरे बोल्डर, पलक झपकते ही नदी में बहे दो परिवारों के 10 लोग, तस्वीरें
इसके बाद, हम सभी लोग मौके पर पहुंचे तो वहां का मंजर डरावना था। बोल्डर और मलबे के बीच दुकानों का कोई पता नहीं था। सिर्फ लोहे व बांस के कुछ एंगल दिखाई दे रहे थे। जो हालात हैं, उसे देखकर डर लग रहा है। ये कहना है गौरीकुंड के मोहन चंद्र गोस्वामी का।