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देहरादून: केंद्र सरकार के खिलाफ 'मौन' धारण कर उपवास पर बैठे पूर्व सीएम हरीश रावत, तस्वीरें...

Fri, 18 Sep 2020 09:40 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार के कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को संसद में पास कराए जाने के विरोध में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने शुक्रवार को दो घंटे का मौन व्रत रखा। गांधी पार्क में उपवास पर बैठे हरीश रावत ने रामनाम की धुन के बीच मौन रहकर विरोध जताया। 
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विरोध को गांधीवादी और अहिंसात्मक रूप देने के लिए हरीश रावत ने खासे जत्न किए। पहले उन्होंने गांधी पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे मौन व्रत के दौरान रामधुन बजती रही। रावत दो घंटे तक मौन रहे और इस बीच तख्ती पर लिखकर ही संदेश देते रहे। 
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दो घंटे के मौन व्रत के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए हरीश रावत ने कहा कि केंद्र सरकार के तीन अध्यादेश पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। इससे किसानों को साफ महसूस हो रहा है कि उनकी जमीन और अधिकार सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इन्हीं तीनों अध्यादेशों को केंद्र सरकार अब संसद से पारित कराकर कानून की शक्ल देना चाह रही है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म किया जा रहा है। यह एक तरीके से किसानों के अधिकार और हितों को कॉरपोरेट के पास गिरवी रखने जैसा है। 

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- फोटो : अमर उजाला
मौन व्रत के बाद रावत ने कहा कि पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में किसान इन तीनों अध्यादेशों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं। वे भी पंजाब और उत्तराखंड के किसानों के समर्थन में उपवास पर बैठे हैं। वहीं, हरीश रावत के उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस के नेताओं के शामिल न होने का सवाल भी उठा। रावत ने कहा कि उन्होंने ही कांग्रेस नेताओं से कहा था कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए आने की जरूरत नहीं है। फिर भी सुरेंद्र अग्रवाल, जोत सिंह बिष्ट, पूर्व मंत्री मातबर सिंह कंडारी सहित अन्य कई कांग्रेसी नेता वहां पहुंचे।
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वहीं, वनाधिकार आंदोलन की अलख जगाते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने बिजली और पानी के बिलों को जलाया और समर्थकों सहित धरना दिया। शुक्रवार को दिलाराम चौक स्थित जल संस्थान के कार्यालय में आयोजित धरना सभा में किशोर ने कहा कि वनाधिकार आंदोलन के तहत 2006 के वनाधिकार कानून को लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। 
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उत्तराखंड के लोगों को वनवासी मानते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार उनके पंरपरागत वन अधिकार और हकहकूक बहाल करे। राज्य के लोगों को मुफ्त बिजली और पानी मिलना चाहिए। जड़ी बूटियों पर स्थानीय लोगों का अधिकार हो और उन्हें शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधा निशुल्क मिलनी चाहिए। 
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पूर्व सीएम हरीश रावत ने धरना स्थल पर पहुंचकर किशोर उपाध्याय के वनाधिकार आंदोलन का समर्थन किया। हरीश रावत ने कहा कि वनाधिकार उन कई कानूनों में से एक है, जिसकी पैरवी कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व पहले से करता आ रहा है। कांग्रेस ने जिस तरह से पंचायत, शिक्षा, सूचना आदि के अधिकार दिए, उसी तरह से वनाधिकार कानून की बात भी कांग्रेस करती रही है।
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