उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बृहस्पतिवार को कीड़ा जड़ी ((कॉर्डिसेप्स) चाय की चुस्की लेंगे।
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Divya Rawat
- फोटो : Divya Rawat
यह औषधीय चाय मशरूम लेडी के नाम से प्रसिद्घ दिव्या रावत ने उत्तराखंड में पहली बार तैयार की है। कीड़ी जड़ी उत्पादन में मिली कामयाबी के बाद वे अपने पैतृक गांव चमोली जिला के कोट कंडारा को कीड़ा जड़ी गांव बनाने की मुहिम शुरू करेगी। बता दें कि हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में एक नायाब जड़ी मिलती है ‘यारशागुंबा’ जिसका उपयोग भारत में तो नहीं होता लेकिन चीन में इसका इस्तेमाल प्राकृतिक स्टीरॉयड की तरह किया जाता है। शक्ति बढ़ाने में इसकी करामाती क्षमता के कारण चीन में ये जड़ी खिलाड़ियों ख़ासकर एथलीटों को दी जाती है।
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harish rawat
थाइलैंड, मलेशिया व वियतनाम में प्रशिक्षण लेने के बाद दिव्या रावत ने पहली बार अपनी लैब में कीड़ा जड़ी चाय उत्पादन किया। अब वे इस औषधीय चाय को व्यावसायिक रूप देने जा रही है। बृहस्पतिवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत शहर के सनबन बिस्ट्रो कैफे में कीड़ा जड़ी चाय की चुस्की लेंगे। दिव्या का कहना है कि कीड़ा जड़ी चाय का उत्पादन कोई भी व्यक्ति कर सकता है।
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kira jari
- फोटो : google
वर्ष 2013 में एक छोटे से कमरे में मशरूम का उत्पादन शुरू किया। आज के प्रयासों से राज्य भर में चार सौ यूनिटों में मशरूम उत्पादन हो रहा है। इसी तरह आने वाले समय में कीड़ा जड़ी चाय के उत्पादन को बढ़ावा देगी। इसकी शुरूआत वे अपने पैतृक गांव से करेगी। मशरूम व कीड़ा जड़ी उत्पादन से स्वरोजगार की काफी संभावना है। इसे बढ़ावा देने से पर्वतीय क्षेत्रों से लोगों का पलायन रुकेगा। चीन, कोरिया व अन्य देशों में कीड़ा जड़ी चाय की काफी डिमांड है। क्योंकि वहां के लोग इस चाय का सेवन ज्यादा करते हैं। सेहत के लिए कीड़ा जड़ी चाय औषधीय के समान है।
कई रोगों के लिए रामबाण है कीड़ा जड़ी चाय
कीड़ा जड़ी (कॉर्डिसेप्स) कई बीमारियों के लिए रामबाण है। शरीर में ऊर्जा के साथ किडनी, कैंसर, एड्स जैसी घातक बीमारियों के लिए कीड़ा जड़ी दवा का काम करती है। इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक बढ़ाने में कारगर है। चीन, कोरिया के एथलीट कीड़ा जड़ी चाय का ज्यादा सेवन करते हैं। इससे एथलीट खिलाड़ियों को ऊर्जा मिलती है। विदेशों में कीड़ा जड़ी चाय के एक कप की कीमत 1000 से 1500 रुपये तक है।