उत्तरकाशी आपदा
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पंचकुला में रहने वाली वंदना बताती हैं कि कल मेरी अपने भाई दुर्गेश पंवार से बात हुई तो उन्होंने कहा कि यहां पर खाने के लिए कुछ नहीं बचा। वह बार-बार यही कह रही थी कि जो राखी भाई के लिए भेजी थी, वह नहीं पहुंची। लेकिन बस यह सुकून है कि भाई और उसका परिवार सुरक्षित है।